Pitru Paksha Mantras: पितृ पक्ष का प्रारंभ हो चुका है. आज तृतीया श्राद्ध है. इस समय में पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध कर्म आदि किए जाते हैं. बहुत से लोगों का सवाल होता है कि पितृ पक्ष के समय में किन मंत्रों का जाप करें या कौन सा स्तोत्र पढ़ें ताकि पितरों को शांति मिले, वे प्रसन्न हों और उनकी कृपा से परिवार की उन्नति हो. सबसे पहले तो आपको बता दें कि पितृ पक्ष के समय आप प्रत्येक दिन पितृ स्तोत्र का पाठ करते हैं या सुनते हैं तो आपका कल्याण होगा. पितृ दोष में कमी आएगी, वहीं उनका आपको आशीर्वाद भी प्राप्त होगा. इसके अलावा पितृ गायत्री मंत्र का भी जाप कर सकते हैं. आइए जानते हैं इन दोनों के बारे में.
1. पितृ गायत्री मंत्र
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च।
नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव नमो नमः।।
2. पितृ स्तोत्र
अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्।
नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा।
सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान्।।
मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा।
तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि।।
नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा।
द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।
देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान्।
अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि:।।
प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च।
योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।
नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु।
स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे।।
सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा।
नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम्।।
अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम्।
अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत:।।
ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:।
जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण:।।
तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:।
नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज।।



















