What's Hot

मिर्जापुर: भारतीय सनातन धर्म और शास्त्र परंपरा में सामान्यतः पुत्रों को ही पिंडदान एवं तर्पण का मुख्य अधिकारी माना गया है. शास्त्रों का मत है कि ज्येष्ठ अथवा कनिष्ठ पुत्र द्वारा अर्पित किया गया जलांजलि ही पितरों की तृप्ति का साधन बनता है. पितृ ऋण से मुक्ति पाने और पूर्वजों की सद्गति के लिए पिंडदान को अनिवार्य बताया गया है.

शास्त्रों में वर्णित भी है, ‘पिता धर्मः पिता स्वर्गः पिता हि परमं तपः, पितरि प्रीतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्वदेवताः’. अर्थात् पूर्वजों के संतुष्ट होने से सभी देवगण स्वतः प्रसन्न हो जाते हैं. किंतु धर्मनगरी काशी और प्रयागराज के मध्य स्थित विंध्य पर्वत के ‘सीता कुंड’ पर यह विधान एक अद्वितीय और पावन रूप ले लेता है. यहाँ मातृ नवमी के दिन महिलाएं स्वयं अपने पितरों का विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान करती हैं.

त्रेतायुग से जुड़ी है यह दिव्य परंपरा
मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ने कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ के निर्देशानुसार अपने पिता महाराज दशरथ की सद्गति के लिए गया स्थित फल्गु नदी तट पर पिंडदान किया था. उसी वनवास काल के दौरान माता सीता ने विंध्य क्षेत्र में इस दिव्य कुंड का सृजन कर अपने पूर्वजों का तर्पण किया था. अनादिकाल से चली आ रही इस परंपरा के साक्ष्य आज भी इस पावन स्थल पर जीवंत हैं. सीता कुंड पर आज भी माता सीता के चरण चिह्न और विंध्य पर्वत शृंखला से अविरल फूटती जलधारा विद्यमान है. मान्यता है कि इस पवित्र जल से तर्पण करने पर पितरों की आत्मा को परम शांति प्राप्त होती है.

मातृ नवमी पर उमड़ती है महिला श्रद्धालुओं की भीड़
स्थानीय पुरोहितों के अनुसार, जब विंध्याचल पर्वत पर आज जैसी भीड़ नहीं हुआ करती थी, तब से ही ग्रामीण क्षेत्रों की माताएं यहां आकर पितृपक्ष की नवमी तिथि पर तर्पण करती आ रही हैं. पुरोहित बताते हैं कि सामान्य पितृपक्ष जहां 15 दिनों का होता है, वहीं माताओं-बहनों के लिए यह 9 दिनों का विशेष पर्व जैसा रहता है. मातृ नवमी के दिन मिर्जापुर, विंध्याचल और आसपास के देहात क्षेत्रों के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश तथा देश के अन्य राज्यों से भी महिलाएं बड़ी आस्था के साथ यहां पहुंचती हैं.

सास और मातृ पितरों की तृप्ति की कामना
सीता कुंड पर तर्पण करने पहुंचीं श्रद्धालु मंजू पांडेय ने बताया, ‘मैं यहां सीता कुंड में स्नान और तर्पण के लिए आई हूं. आज मातृ नवमी का पावन दिन है. देश के विभिन्न क्षेत्रों से महिलाएं यहाँ विशेष रूप से अपनी सास एवं मातृ-पितरों को तृप्ति दिलाने और उनके निमित्त जल अर्पित करने आती हैं. इस अनुष्ठान को संपन्न करने से पूर्वजों को सद्गति मिलती है और स्वयं के अंतःकरण को भी असीम शांति प्राप्त होती है.’

Advertisement Carousel
Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031