Rajasthan News: साल 2023 में ओटीटी पर रिलीज हुई बॉलीवुड अभिनेता शाहिद कपूर की ‘फर्जी’ वेब सीरिज ने, रातों-रात अमीर बनने का ऐसा चस्का लगाया कि 6 लड़कों ने मिलकर राजस्थान के डूंगरपुर जिले में नकली इंडियन करेंसी छापने की फैक्ट्री ही खोल दी. इस काम को सफाई से करने के लिए उन्होंने 3 साल तक प्लानिंग की थी. यूट्यूब से फोटोशॉप सीखा, चीन की ई-कॉमर्स वेबसाइट से खास पेपर मंगवाया और अपना सिंडिकेट बनाया. लेकिन जब राजस्थान में पहली खैप तैयार हुई और उसके बदले असली नोट लेने का समय आया, तभी पुलिस ने छापा मार दिया और सभी को गिरफ्तार कर सारा सामान जब्त कर लिया.
अलीबाबा वेबसाइट से मंगवाया कागज
डूंगरपुर पुलिस ने 23 अक्टूबर को इस रैकेट का पर्दाफाश करते हुए बताया, ‘इस खेल की शुरुआत हरियाणा के अंबाला निवासी आनंद राजपूत उर्फ करण ने की थी. उसी ने साल 2023 में फर्जी देखने के बाद यूट्यूब से फोटोशॉप सीखा और नकली नोटों का रंग व डिजाइन सेट करना शुरू किया. जब ये काम पूरा हो गया तो वो खास पेपर नहीं मिला, जिस पर नोट छपता है. इसके बाद उसने चीन की ई-कॉमर्स वेबसाइट अलीबाबा से खास जीएसएम का वो पेपर इंडिया मंगवा लिया. इसी दौरान इंस्टाग्राम पर उसकी पहचान यूपी के प्रतापगढ़ निवासी रवि कुमार मिश्रा से हुई. आनंद ने उसे अपने साथ जोड़ लिया और नोट छापने का पूरा काम उसे सौंप दिया.
बॉस को धोखा देकर बना मास्टरमाइंड
अधिकारियों के मुताबिक, ‘आनंद ने चीन से मंगाया हुआ सारा कागज अंबाला बुलाकर रवि को दे दिया और कहा कि नोट छापकर मुझे भेज देना. रवि ने पूरी चालाकी से नोटों के बंडल प्रिंट किए, लेकिन गुरु को पार्सल में नोटों की जगह सिर्फ रद्दी गत्ते पैक करके भेज दिए. इसके बाद रवि ने आनंद को हर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ब्लॉक कर दिया और खुद इस धंधे का बॉस बन बैठा.’
टेलीग्राम पर बढ़ाया काला कारोबार
रवि ने इस काम को बड़े लेवल पर ले जाने के लिए टेलीग्राम का सहारा लिया. वहां उसकी मुलाकात यूपी के कानपुर निवासी मोहम्मद आरिफ से हुई. आरिफ ‘अंकित पेपर सेलर’ नाम से चैनल चलाता था और दिल्ली के पेपर मार्केट से जीएसएम चेक करके खास कागज सप्लाई करता था. वहीं, छत्तीसगढ़ के दुर्ग निवासी तरुण मालेकर ने रवि को 500 रुपये के असली नोट जैसी दिखने वाली हाई-क्वालिटी पीएसडी फाइलें मुहैया कराईं.
डूंगरपुर तक कैसे पहुंचे ये लोग?
पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क बढ़ते ही रवि ने इंस्टाग्राम के जरिए डूंगरपुर के नयन जोशी और भावेश खटीक को कूरियर से नकली नोटों के सैंपल भेजे. नोटों की बेहतरीन क्वालिटी देखकर दोनों ने रवि को राजस्थान बुला लिया. बीते 13 अगस्त को रवि डूंगरपुर पहुंचा, जहां वसुंधरा विहार में एक कमरा किराए पर लिया गया. यहां प्रिंटर, खास इंक और नोट गिनने की मशीन लगाकर उन्होंने करीब 4,95,500 रुपये छाप डाले गए. लेकिन 29 सितंबर को जैसे ही भावेश और नयन रामसागड़ा इलाके के माडा स्कूल ग्राउंड में अपनी पहली खेप की सप्लाई करने पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रंगे हाथों दबोच लिया.
पंजाब से गिरफ्तार हुआ मास्टरमाइंड
पुलिस ने प्रेस रिलीज में बताया, ‘अपने साथियों के पकड़े जाने की भनक लगते ही मास्टरमाइंड रवि डूंगरपुर से फरार हो गया. उसने अपना फोन बंद कर लिया और लगातार अपनी लोकेशन बदलने लगा. एसपी मनीष कुमार की सख्त मॉनिटरिंग में जिला साइबर सेल और विशेष टीम ने हार नहीं मानी. तीन दिनों तक 1300 किलोमीटर पीछा करने के बाद पुलिस ने आखिरकार रवि को लुधियाना रेलवे स्टेशन से उस वक्त गिरफ्तार कर लिया, जब वह प्रयागराज भागने की फिराक में था.’



















