नई दिल्ली: टीम इंडिया के पूर्व कप्तान एमएस धोनी ने आज की युवा पीढ़ी को एक अहम संदेश दिया है। उन्होंने जेन जी और जेन अल्फा को शारीरिक रूप से सक्रिय रहने, खेलों से जुड़ने और खानपान की आदतों में सुधार करने की सलाह दी। धोनी ने कहा कि लंबे समय तक बैठे रहना और जंक फूड का अधिक सेवन भविष्य में सेहत के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। उन्होंने यह बात लेखक जावेद अख्तर के साथ एक कार्यक्रम में बातचीत के दौरान कही।
धोनी ने आज की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधियों की कमी पर चिंता जताई। उनका कहना था कि पहले लोगों की दिनचर्या में स्वाभाविक रूप से चलना-फिरना ज्यादा शामिल होता था। इससे शरीर सक्रिय रहता था और रोजाना की गतिविधियों के जरिए व्यायाम भी हो जाता था। इसके उलट, आज कई लोग घर से ऑफिस तक गाड़ी या दूसरी सुविधाओं से पहुंचते हैं, दिनभर कुर्सी पर बैठे रहते हैं और फिर वाहन से घर लौट जाते हैं। इस तरह की दिनचर्या में शरीर को पर्याप्त एक्सरसाइज नहीं मिल पाती।
खेल को रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करने की अपील
धोनी के मुताबिक अगर फिजिकल एक्सरसाइज की कमी के साथ फास्ट फूड, तला हुआ खाना और ज्यादा मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन भी जुड़ जाए, तो लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। धोनी ने युवा पीढ़ी को सलाह दी कि वे नियमित रूप से खेलें और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालें। उनका संदेश केवल पेशेवर खिलाड़ी बनने तक सीमित नहीं था, बल्कि हर युवा को अपनी फिटनेस पर ध्यान देने की जरूरत पर केंद्रित था। उनके मुताबिक, शुरुआत में निष्क्रिय जीवनशैली का असर भले ही साफ नजर न आए, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ इसके परिणाम सामने आ सकते हैं। इसलिए कम उम्र से ही अच्छी आदतें अपनाना जरूरी है। धोनी की यह सलाह ऐसे समय में आई है, जब पढ़ाई, काम और डिजिटल डिवाइस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कई युवाओं की दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियों के लिए कम समय बचता है।
30 की उम्र के बाद दिख सकता है असर
धोनी ने खास तौर पर इस बात पर जोर दिया कि खराब दिनचर्या का नुकसान हमेशा तुरंत नजर नहीं आता। लंबे समय तक व्यायाम से दूरी बनाए रखने और असंतुलित खानपान की आदतें आगे चलकर परेशानी पैदा कर सकती हैं। युवाओं के लिए उनका संदेश साफ है कि अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें, रोजाना कुछ समय खेल या व्यायाम के लिए निकालें और खानपान पर ध्यान दें।
जावेद अख्तर ने भी युवा पीढ़ी की तारीफ की
कार्यक्रम के दौरान जावेद अख्तर ने आज की युवा पीढ़ी के नैतिक मूल्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी में कई ऐसे गुण हैं, जिनसे पिछली पीढ़ियों के लोग भी सीख सकते हैं। जावेद अख्तर का मानना था कि बुजुर्गों को यह नहीं मान लेना चाहिए कि हर मामले में उनका नजरिया ही सही है। युवा पीढ़ी के विचारों और मूल्यों को समझना भी जरूरी है। वहीं, धोनी ने बातचीत में युवाओं की सेहत और जीवनशैली पर ध्यान केंद्रित किया। इस तरह दोनों ने अलग-अलग पहलुओं से नई पीढ़ी के सामने आने वाली चुनौतियों और उनकी संभावनाओं पर अपनी बात रखी।



















