नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने चीन से आयात होने वाले कुछ टाइटेनियम डाइऑक्साइड उत्पादों पर 460 से 681 डॉलर प्रति टन तक का एंटी-डंपिंग ड्यूटी फिर से लागू कर दी है। सरकार ने यह कदम नई जांच में सामने आए रिजल्ट के बाद उठाया है। जांच में पाया गया कि चीन से कम कीमत पर हो रहे आयात से भारत के घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचा है। राजस्व विभाग की ओर से शनिवार को जारी नॉटिफिकेशन के मुताबिक, यह ड्यूटी 5 सालों तक लागू रहेगी। हालांकि, यदि इससे पहले इसे वापस लिया जाता है, इसमें बदलाव किया जाता है या इसकी जगह कोई दूसरा आदेश लागू होता है, तो इसकी अवधि कम हो सकती है।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा हुई जांच
चीन से आने वाले टाइटेनियम डाइऑक्साइड पर इससे पहले मई 2025 में भी एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय पेंट एसोसिएशन की ओर से दायर मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस मामले पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया था। इसके बाद पहले लगाए गए शुल्क को वापस ले लिया गया।
इसके बाद वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने मामले की नए सिरे से जांच की। DGTR ने 3 अगस्त को अपनी नई जांच के निष्कर्ष जारी किए और शुल्क लगाने की सिफारिश की। जांच में पाया गया कि चीन से आने वाले उत्पाद डंपिंग कीमतों पर बेचे जा रहे थे, जिससे भारतीय घरेलू उत्पादकों को नुकसान हुआ।
किस काम आता है टाइटेनियम डाइऑक्साइड?
टाइटेनियम डाइऑक्साइड एक सफेद पिगमेंट होता है, इसका उपयोग खासतौर पेंट, कोटिंग्स, प्लास्टिक और कई अन्य प्रोडक्ट्स को बनाने में किया जाता है। दीवाली से पहले भारत में पेंट्स और उससे बनने वाले प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ जाती है। चीन से सस्ती कीमतों पर किए जाने वाले इंपोर्ट को रोकने से पेंट और प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों की इनपुट कॉस्ट बढ़ सकती है।
क्या है एंटी-डंपिंग शुल्क?
एंटी-डंपिंग ड्यूटी किसी दूसरे देश से आयात होने वाले उत्पाद पर लगाई जाने वाली एक्स्ट्रा ड्यूटी को कहते है। जब किसी देश की कंपनियां अपने उत्पादों को दूसरे देश के बाजार में अनुचित रूप से कम कीमत पर बेचती हैं और इससे वहां के घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचता है, तो जांच के बाद ऐसा शुल्क लगाया जा सकता है।
इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादकों को गैरजरूरी मूल्य प्रतिस्पर्धा से बचाना है। चीन से आने वाले कुछ टाइटेनियम डाइऑक्साइड उत्पादों पर शुल्क दोबारा लगाने का फैसला इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।



















