इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने राजनीतिक और कानूनी, दोनों मोर्चों पर बड़ी चुनौतियां हैं। देश में भ्रष्टाचार के तीन मामलों में मुकदमा झेल रहे नेतन्याहू के खिलाफ गाजा में कथित युद्ध अपराधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) का गिरफ्तारी वारंट भी जारी है। वहीं, इजरायल पर नरसंहार के आरोपों को लेकर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में भी मामला चल रहा है। ऐसे में सवाल है कि अगर नेतन्याहू सत्ता से बाहर होते हैं, तो उनके खिलाफ चल रहे मामलों पर क्या असर पड़ेगा और क्या उन्हें गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है?
चुनाव में कड़ा मुकाबला, कुर्सी पर मंडराया खतरा
पिछले तीन सालों में इजरायल गाजा, लेबनान और ईरान के साथ युद्धों में शामिल रहा है। इन सब के बीच नेतन्याहू तीसरी बार लगातार और कुल चौथी बार प्रधानमंत्री बनने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस बार उनकी राह आसान नहीं है। ओपिनियन पोल के नतीजे बताते हैं कि इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। कई सर्वे में नेतन्याहू अपने इस प्रतिद्वंद्वी से पीछे भी चल रहे हैं।
भ्रष्टाचार के तीन बड़े मामले और अदालती घेराबंदी
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर लंबे समय से देश की अदालतों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप चल रहे हैं। कानूनी जानकारों के मुताबिक, उन पर मुख्य रूप से तीन मामलों में सुनवाई चल रही है-
- मामला 1000 (धोखाधड़ी और विश्वासघात): इस मामले में आरोप है कि नेतन्याहू और उनके परिवार ने कुछ बड़े कारोबारियों से नियमों के विरुद्ध महंगे गिफ्ट लेकर और बदले में उन्हें राजनीतिक और आर्थिक लाभ पहुंचाया।
- मामला 2000 (समझौते की कोशिश): इजरायल के एक प्रमुख अखबार के प्रकाशक के साथ कथित तौर पर सकारात्मक मीडिया कवरेज हासिल करने के बदले प्रतिद्वंद्वी अखबार के कारोबार को सीमित करने का सौदा करने का आरोप है।
- मामला 4000 (रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी): संचार मंत्री रहते हुए एक बड़े मीडिया कारोबारी को अनुचित नियामक लाभ पहुंचाने और उसके बदले अपने पक्ष में सकारात्मक खबरें प्रसारित करवाने का गंभीर आरोप है।
नेतन्याहू ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है और इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित ‘विच हंट’ करार दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुलकर नेतन्याहू के समर्थन में आए हैं और उन्हें माफ करने की मांग कर चुके हैं।
ICC का गिरफ्तारी वारंट और गाजा युद्ध के आरोप
पिछले साल 21 नवंबर 2024 को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने गाजा पट्टी में कथित युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध के मामलों में बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। हेग स्थित अदालत ने भूख को युद्ध के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने, नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाने और मानवीय सहायता तथा पानी-बिजली की सप्लाई रोकने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में दक्षिण अफ्रीका द्वारा दायर नरसंहार के मामले का भी इजरायल सामना कर रहा है, जिसे कई देशों का समर्थन प्राप्त है।
सत्ता गई तो बढ़ सकती हैं नेतन्याहू की कानूनी मुश्किलें
अगर बेंजामिन नेतन्याहू चुनाव हार जाते हैं और प्रधानमंत्री पद से हटते हैं, तो उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों और अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, सत्ता जाने से उनके खिलाफ मुकदमों में तेजी आएगी या गिरफ्तारी होगी, यह तय नहीं है। इजरायल में भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई अदालतों में जारी रह सकती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) का गिरफ्तारी वारंट उनकी विदेश यात्राओं को भी प्रभावित कर सकता है। ICC के सदस्य देशों में जाने पर उन्हें गिरफ्तारी का जोखिम हो सकता है।



















