रायपुर | इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कृषि मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी चक्रवाती चेतावनी के अनुसार, पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान “अर्नब” (Arnab) आंध्र प्रदेश के तटों को पार करते हुए कमजोर पड़ रहा है। हालांकि, इस चक्रवात का सीधा और व्यापक प्रभाव छत्तीसगढ़ के मौसम पर देखने को मिल रहा है, जिसके चलते राज्यभर में आगामी 1 नवंबर तक बारिश, तेज हवाओं और वज्रपात (बिजली गिरने) की पूरी संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 28 और 29 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ के कई जिलों में मध्यम से लेकर भारी और अति भारी बारिश हो सकती है। विशेष तौर पर महासमुंद, रायपुर, दुर्ग, बालोद, धमतरी, कांकेर, गरियाबंद और बस्तर जैसे जिलों में भारी से अति भारी वर्षा के साथ 50 से 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ वज्रपात का अंदेशा है। इस स्थिति को देखते हुए किसानों और आम नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।
किसानों और पशुपालकों के लिए जरूरी निर्देश:
- फसल सुरक्षा: जिन किसानों की धान, दलहन और तिलहन फसलें पककर तैयार हैं, वे अगले 2 से 4 दिनों तक कटाई टाल दें। जो फसलें काटी जा चुकी हैं, उन्हें तत्काल सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर तिरपाल से ढककर रखें, ताकि जलभराव से बचाया जा सके।
- जल निकासी: खेतों में पानी न रुके, इसके लिए तुरंत अतिरिक्त पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करें।
- सब्जी एवं बागवानी: लता वाली सब्जियों (जैसे करेला, लौकी) के लिए बांस का सहारा (स्टेकिंग) दें और फलदार पौधों विशेषकर केले को बांस से बांधकर सुरक्षित करें।
- पशुपालन: पशुओं को खुले में या पेड़ों के नीचे न बांधें, बल्कि उन्हें सूखे और सुरक्षित स्थानों पर रखें तथा उनके चारे व पीने के पानी को भी सुरक्षित रखें।



















