अमेरिका के अटलांटा में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया यानी QUAD के विदेश मंत्रियों की बैठक में आर्थिक सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति से जुड़ी नई पहलों पर हुई चर्चा पर चीन ने नाराजगी जताई है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने अपने एक संपादकीय में आरोप लगाया है कि अमेरिका क्वाड का इस्तेमाल चीन को आर्थिक और तकनीकी रूप से घेरने के लिए कर सकता है। अखबार ने कहा कि अगर क्वाड चीन विरोधी गठबंधन नहीं है, तो उसे अपने कार्यों से यह साबित करना चाहिए। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और महत्वपूर्ण खनिजों की प्रोसेसिंग में चीन की मजबूत स्थिति किसी राजनीतिक संरक्षण का नतीजा नहीं है, बल्कि यह दशकों की कड़ी बाजार प्रतिस्पर्धा, तकनीकी अनुसंधान और व्यापक औद्योगिक सहयोग का नतीजा है।
चीनी मीडिया ने तर्क दिया कि कुछ देशों का स्पेशल गुट बनाकर या ब्लॉक पॉलिटिक्स में शामिल होकर रातों-रात नई और वैकल्पिक क्षमताएं तैयार नहीं की जा सकतीं। रिपोर्ट में कहा गया कि सप्लाई चेन को राजनीतिक आधार पर दोबारा खींचने की यह जिद केवल वैश्विक कंपनियों की लागत बढ़ाएगी और एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक उत्पादकता पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
मार्को रुबियो के बयान पर प्रतिक्रिया
अटलांटा में बैठक के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया था कि क्वाड कोई चीन-विरोधी गठबंधन नहीं है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्लोबल टाइम्स ने कहा कि क्वाड का असली स्वरूप अमेरिकी अधिकारियों के बयानों से नहीं, बल्कि जमीन पर की गई उसकी कार्रवाई से तय होगा।
अखबार ने कहा कि अगर इसका मकसद क्षेत्रीय औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना होता, तो कोई आपत्ति नहीं होती। लेकिन, सप्लाई चेन सुरक्षा की आड़ में अपनाई गई कोई भी ऐसी रणनीति, जिसका उद्देश्य चीनी उद्योगों को वैश्विक बाजार से बाहर करना या बीजिंग पर अनुचित तकनीकी प्रतिबंध लगाना हो, तो यह कूटनीतिक पर्दा चीन की आर्थिक घेराबंदी को छिपा नहीं पाएगा।
जापान की भूमिका पर भी उठाए सवाल
ग्लोबल टाइम्स ने क्वाड के अन्य सदस्य देशों की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। अखबार ने जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी पर आरोप लगाया कि वे पूर्वी और दक्षिण चीन सागर से जुड़े मुद्दों को बार-बार उठाकर अपने देश की रणनीतिक चिंताओं को बहुपक्षीय मंचों पर थोप रहे हैं।
भारत और ऑस्ट्रेलिया के हितों का दिया हवाला
भारत के संबंध में चीनी मीडिया ने दावा किया कि भारत हमेशा अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देता है। अखबार के अनुसार, भारत बहुपक्षीय मंचों का इस्तेमाल अपने घरेलू औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और नए अवसर पैदा करने के लिए करता है, न कि किसी दूसरे देश द्वारा बनाई गई चीन-विरोधी रणनीति का हिस्सा बनने के लिए। इसी तरह ऑस्ट्रेलिया के लिए भी चीन के साथ अपने मजबूत व्यापारिक संबंधों को खतरे में डालना एक नुकसानदेह कदम होगा।
क्वाड सदस्य देशों के हित मेल नहीं खाते
चीनी सरकारी मीडिया ने निष्कर्ष में कहा कि चूंकि क्वाड सदस्य देशों के आर्थिक और रणनीतिक हित आपस में मेल नहीं खाते, इसलिए चीन के खिलाफ एक संयुक्त आर्थिक मोर्चा बनाने का विचार केवल एक भ्रम है। अगर वाशिंगटन चीन के साथ विवाद बढ़ाने के लिए क्वाड का इस्तेमाल जारी रखता है, तो यह गठबंधन अमेरिका के लिए ही एक चुनती साबित होगा, जिसे संभालना बहुत कठिन होगा। अखबार ने कहा कि इस क्षेत्र को फिलहाल गुटबाजी या विभाजन की नहीं, बल्कि खुले आर्थिक सहयोग की जरूरत है।
QUAD के विदेश मंत्रियों की बैठक में क्या हुआ
गौरतलब है कि शनिवार को क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की एक बैठक हुई। बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में आर्थिक दबाव, मनमाने निर्यात प्रतिबंधों और अत्यधिक उत्पादन क्षमता जैसे मुद्दों पर चिंता जताई गई। क्वाड की ओर से जारी संयुक्त बयान में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है।
मई 2026 में घोषित क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव के तहत, सदस्य देशों ने इलेक्ट्रॉनिक कचरे और कबाड़ से महत्वपूर्ण खनिजों को निकालने और किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया।
संयुक्त बयान में कचरा संग्रहण नेटवर्क, प्रसंस्करण संयंत्रों और रिफाइनरियों में निजी क्षेत्र के निवेश का स्वागत किया गया। इसके अलावा अमेरिका ने भारत और आसियान (ASEAN) देशों में कचरे से महत्वपूर्ण खनिज निकालने के लिए बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास में मदद हेतु 10 मिलियन डॉलर देने का वादा किया।



















