नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए दान के पैसे में कथित हेराफेरी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट से निचली अदालत पहुंच गया है। मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी होने के आरोपों पर दायर याचिकाओं को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने निपटा दिया है। जिसके साथ ही, यूपी सरकार ने अदालत को बताया कि मामले में SIT आरोपपत्र दाखिल कर चुका है। इसके बाद कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को कानून का पालन करते हुए आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने साफ किया कि उसने आरोपों की सच्चाई या मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है। हालांकि, मामले से जुड़े जनहित को देखते हुए याचिकाकर्ताओं को भी सुनवाई में अपनी बात रखने की अनुमति दी गई है। वे उसी तरह मजिस्ट्रेट की मदद कर सकेंगे, जैसे किसी आपराधिक मामले में पीड़ित पक्ष को सहायता करने का अधिकार मिलता है।
CCTV में सामने आए 105 मामले
SIT की जांच में मंदिर के दान की गिनती के दौरान नकदी को कथित तौर पर बिना अनुमति निकालने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आई थीं। जांच टीम ने CCTV फुटेज और दूसरे डिजिटल सबूतों की मदद से इन घटनाओं की पहचान की। मामले में 8 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
आठ लोगों के खिलाफ दाखिल हुई चार्जशीट
- SIT ने 23 सितंबर को अयोध्या की स्थानीय अदालत में 8 आरोपियों के खिलाफ करीब 70 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी।
- आरोपियों में अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामाशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं।
- पुलिस ने 7 आरोपियों से कथित हेराफेरी से जुड़ी 79.85 लाख रुपये की रकम बरामद की है। जांच में 173 गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए।
चांदी और दूसरी भेंटों में नहीं मिली गड़बड़ी
SIT ने 803 कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड और SBI लॉकर में रखी वस्तुओं का मिलान किया। इनमें कोई फर्क नहीं मिला। बिना रसीद वाली 86 दूसरी वस्तुओं की भी जांच की गई। 200 किलो और 38.288 किलो चांदी की ईंटों समेत अन्य भेंटों में भी गड़बड़ी नहीं मिली।
याचिकाकर्ता रख सकेंगे अपनी बात
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार मामले को आगे बढ़ाएंगे। जनहित को देखते हुए याचिकाकर्ता भी पीड़ित पक्ष की तरह कार्यवाही में सहायता कर सकेंगे। कोर्ट ने साफ किया कि आरोपों पर उसकी फिलहाल कोई राय नहीं है। वो किसी को दोषी या निर्दोष नहीं कह रहे हैं।



















