बागेश्वर: हिंदू धर्म में भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का रचयिता माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी ने ही संपूर्ण ब्रह्मांड और जीव-जगत की रचना की थी. इसके बावजूद देश में उनके मंदिर और पूजा स्थल बहुत कम देखने को मिलते हैं. इसके पीछे कई पौराणिक कथाएं और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. इनमें सबसे प्रसिद्ध कथा राजस्थान के पुष्कर में हुए यज्ञ और देवी सावित्री के श्राप से जुड़ी है.
बागेश्वर के प्रवक्ता हरीश दफौटी ने लोकल 18 बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा ने पुष्कर में यज्ञ करने का निर्णय लिया. यज्ञ को निर्धारित समय पर पूरा करना जरूरी थी, इस दौरान उनकी पत्नी देवी सावित्री का यज्ञ में मौजूद होना जरूरी था. लेकिन वह समय पर नहीं पहुंच सकीं. यज्ञ का शुभ मुहूर्त निकलता देख ब्रह्मा जी ने गायत्री नामक देवी से विवाह कर यज्ञ संपन्न किया.
पुष्कर को श्राप से मुक्त रखा
जब देवी सावित्री वहां पहुंचीं तो उन्हें यह देखकर अत्यंत क्रोध आया कि ब्रह्मा जी ने उनके स्थान पर दूसरी देवी से विवाह कर यज्ञ पूरा कर लिया. इसी बात से नाराज होकर उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि पृथ्वी पर कहीं भी उनकी पूजा नहीं होगी. हालांकि, पुष्कर को इस श्राप से मुक्त रखा गया. यही वजह मानी जाती है कि पुष्कर में भगवान ब्रह्मा का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
शिव पुराण में भी मिलता है उल्लेख
भगवान ब्रह्मा की पूजा कम होने के पीछे एक अन्य पौराणिक कथा शिव पुराण से भी जुड़ी है. कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ. विवाद का समाधान करने के लिए भगवान शिव ने ज्योतिर्लिग के रूप में प्रकट होकर दोनों देवताओं से उसका आदि और अंत खोजने को कहा. भगवान विष्णु ज्योतिर्लिग का अंत खोजने में असफल रहे और उन्होंने अपनी असफलता स्वीकार कर ली.
वहीं ब्रह्मा जी ने अंत खोजने में असफल होने के बावजूद असत्य कहा कि उन्होंने ज्योतिर्लिग का शीर्ष देख लिया है. उनकी इस बात से भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्हें श्राप दिया कि पृथ्वी पर उनकी पूजा नहीं होगी. इस कथा में केतकी के फूल का भी उल्लेख मिलता है, जिसे ब्रह्मा जी ने अपने दावे के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया था.
सृष्टि के रचयिता होने के बावजूद पूजा
एक अन्य धार्मिक मान्यता में देवर्षि नारद के शाप का भी उल्लेख मिलता है. हालांकि, ब्रह्मा जी की पूजा कम होने के पीछे अलग-अलग पुराणों में विभिन्न कथाएं प्रचलित हैं. धार्मिक दर्शन के अनुसार, ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना, भगवान विष्णु उसका पालन और भगवान शिव संहार के देवता माने जाते हैं. भक्तों में भगवान विष्णु और शिव की पूजा अधिक प्रचलित होने के कारण भी ब्रह्मा जी के मंदिरों की संख्या कम है. उन्हें सृष्टि का आधार और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर आज भी उनकी प्राचीन धार्मिक महत्ता और आस्था का प्रमुख केंद्र है. ठीक ऐसे ही एक मंदिर चंडिका मंदिर के ठीक सामने वाली पहाड़ी में ब्रह्मा जी का है, जहां पर एक साधु रहा करते हैं, लेकिन वहां पूजा पाठ बहुत कम होती है



















