भोपाल : केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। गुरुवार को नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद निर्वाचन अधिकारी उमेश कुमार शर्मा ने उनके निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की। इस दौरान उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को निर्वाचन प्रमाणपत्र सौंपा।
पुरी के नामांकन पत्र पर कांग्रेस ने 100 से अधिक कमियां होने का दावा करते हुए आपत्तियां दर्ज कराई थीं। कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और निर्दलीय प्रत्याशियों ने शपथपत्र में पत्नी के नाम का उल्लेख नहीं होने, विदेशी संपत्तियों और बैंक खातों का विवरण देने के तरीके तथा नोटरी सत्यापन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। निर्वाचन अधिकारी ने पुरी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। दस्तावेजों की जांच के बाद सभी आपत्तियां खारिज कर दी गईं। निर्वाचन अधिकारी के अनुसार जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं पाया गया। कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी राजकुमार लोहानी का नामांकन अनिवार्य फॉर्म-26 शपथपत्र संलग्न नहीं होने के कारण निरस्त कर दिया गया। लोहानी ने दस्तावेजों की कमी दूर करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने उनकी मांग स्वीकार नहीं की। दूसरे निर्दलीय प्रत्याशी कांते सायन्ना का नामांकन भी दस्तावेजों में अधूरी जानकारी के चलते निरस्त कर दिया गया। इसके बाद पुरी अकेले वैध प्रत्याशी रह गए और निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए।
राज्यसभा की यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के 14 अक्टूबर को सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद रिक्त हुई थी। निर्वाचन आयोग ने इसके बाद उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की थी। भाजपा ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को प्रत्याशी घोषित किया था। उन्होंने 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में विधानसभा पहुंचकर नामांकन दाखिल किया था। कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और आतिफ अकील ने पुरी के नामांकन को वैध ठहराने के फैसले पर सवाल उठाते हुए निर्वाचन अधिकारी पर पक्षपात का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले को न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि नामांकन प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया।



















