दुनिया के कई देशों के सामने आने वाली सर्दियों में प्राकृतिक गैस का संकट खड़ा हो सकता है। मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से गैस की सप्लाई प्रभावित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में चिंता बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इस समुद्री रास्ते से गैस की आवाजाही जल्द सामान्य नहीं हुई तो 2026-27 की सर्दियों में दुनिया को जरूरत के मुताबिक गैस मिलना मुश्किल हो सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। यहां से कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) दूसरे देशों तक भेजते हैं। लेकिन इस रास्ते पर आवाजाही प्रभावित होने से गैस की सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है। अब इसका असर आने वाले महीनों में और बढ़ने की आशंका है।
कतर और UAE से गैस की सप्लाई में भारी कमी
IEA की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च से अक्टूबर 2026 के बीच कतर और UAE से LNG की सप्लाई पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 60 अरब घन मीटर घट गई। इसका असर दुनिया के कुल LNG उत्पादन पर भी पड़ा। इस दौरान वैश्विक उत्पादन में करीब 5 फीसदी यानी 20 अरब घन मीटर की कमी दर्ज की गई।
एजेंसी का अनुमान है कि नवंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच दुनिया की LNG सप्लाई में 10 से 25 अरब घन मीटर तक की कमी हो सकती है। यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गैस की आवाजाही कब तक सामान्य होती है।
अमरीका-कनाडा से बढ़ेगी सप्लाई, फिर भी नहीं होगी भरपाई
गैस की कमी को पूरा करने के लिए अमरीका, कनाडा और मैक्सिको से सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है। पश्चिमी अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के नए प्रोजेक्ट से भी बाजार को अतिरिक्त गैस मिलेगी। IEA के मुताबिक, नए प्रोजेक्ट से करीब 18 अरब घन मीटर और पहले से चल रहे संयंत्रों से 3 अरब घन मीटर अतिरिक्त गैस मिलने का अनुमान है।
हालांकि, इतनी अतिरिक्त गैस भी कतर और UAE से होने वाली सप्लाई में आई कमी को पूरा नहीं कर पाएगी। यानी दूसरे देशों से उत्पादन बढ़ने के बावजूद बाजार पर दबाव बना रह सकता है।
होर्मुज खुलने या बंद रहने से तय होंगे हालात
IEA ने अपनी रिपोर्ट में दो संभावित स्थितियां बताई हैं। अगर जनवरी 2027 से होर्मुज जलडमरूमध्य धीरे-धीरे खुलना शुरू हो जाता है तो सर्दियों में वैश्विक LNG सप्लाई करीब 3 फीसदी यानी 9 अरब घन मीटर घट सकती है। वहीं, अगर यह रास्ता मार्च 2027 के आखिर तक बंद रहता है तो कमी बढ़कर करीब 7 फीसदी यानी 20 अरब घन मीटर तक पहुंच सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए गैस प्रोजेक्ट शुरू होने में देरी या मौजूदा संयंत्रों में उत्पादन रुकने से परेशानी और बढ़ सकती है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई बहाल होना दुनिया के गैस बाजार के लिए बेहद अहम होगा।



















