कोरोना महामारी के दौर में अमेरिकी विश्वविद्यालयों की कोरोना टीकाकरण नीति ने भारत समेत विदेशी छात्रों को परेशानी मे डाल दिया है। भारत में कोवाक्सिन या स्पूतनिक वी टीका लगवा चुके भारतीय छात्रों को अमेरिकी विश्वविद्यालयों ने फिर से टीका लगावाने के लिए कहा है।
अमेरिका के सभी विश्वविद्यालय छात्रों को फिर से टीकाकरण करने के लिए कह रहे हैं, यदि उन्हें कोविड-19 के खिलाफ वैसे टीके लगाए गए हैं जिन्हें अभी तक विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मंजूरी नहीं मिली है। इसमें भारतीय छात्र भी शामिल हैं जिन्होंने भारत बायोटेक का कोवाक्सिन या रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी लगवाया है।
अमेरिकी विश्वविद्यालय इन टीकों की प्रभावकारिता और सुरक्षा पर डाटा की कमी को इसका कारण बता रहे हैं। संबंधित छात्रों को शरद ऋतु में होने वाले सेमेस्टर के शुरू होने से पहले पुन: टीकाकरण करने के लिए कहा जा रहा है।
दो अलग-अलग टीके लेने से सुरक्षा को लेकर चिंता
विश्वविद्यालयों के इस आदेश के बाद ये छात्र दो अलग-अलग टीके लेने से सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। 25 साल की मिलोनी दोशी जो कोलंबिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स को ज्वाइन करने वाली है। उसे भारत में पहले ही कोवाक्सिन की दो खुराकें दी जा चुकी हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय ने उसे कॉलेज परिसर में आने पर फिर से टीकाकरण कराने के लिए कहा है।
इस पर दोशी का कहना है कि ‘मैं सिर्फ दो अलग-अलग तरह के टीके लेने को लेकर चिंतित हूं। उन्होंने कहा कि आवेदन प्रक्रिया चक्र का सबसे कठिन हिस्सा होगा, लेकिन वास्तव में यह सब अनिश्चित और चिंता पैदा करने वाला रहा है।’
छात्रों के सामने आ रही इस तरह की चिंता पर, अमेरिका के रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के प्रवक्ता क्रिस्टन नोर्डलंड ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि ‘चूंकि कोविड-19 टीके विनिमेय (इंटरचेंजेबल) नहीं हैं, इसलिए दो अलग-अलग टीकों को लेने से सुरक्षा और प्रभावशीलता का अध्ययन नहीं किया गया है।’



















