कोरोना वायरस के नए ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इस बीच दक्षिण अफ्रीका के ओमिक्रॉन एपिसेंटर में एक बड़े अस्पताल का शुरुआती डेटा बताता है कि यहां कोविड-19 संक्रमितों की संख्या बढ़ी है, लेकिन मरीजों को गंभीर रूप से मेडिकल सहायता की कम ही जरूरत पड़ रही है. प्रीटोरिया में द स्टीव बाइको और श्वाने जिला अस्पताल ने 14 से 29 नवंबर के बीच 166 नए मामले दर्ज किए थे, जिनमें से 42 मरीज अभी भी वॉर्ड में दाखिल हैं. साउथ अफ्रीकन मेडिकल रिसर्च काउंसिल और स्टीव बाइको अस्पताल में इंफेक्शियस डिसीज डॉक्टर फरीद अब्दुल्लाह ने इन मरीजों में दिख रहे लक्षणों और उनकी स्थिति को बारीकी से ऑब्जर्व किया है. नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्यूनिकेबल डिसीज ने पुष्टि की थी कि एपिसेंटर में लगभग सभी नए मामले ओमिक्रॉन वैरिएंट के हैं. हालांकि, डॉ. अब्दुल्ला और उनकी टीम अभी ये साक्ष्य नहीं जुटा पाई है कि संक्रमण के सभी नए मामले ओमिक्रॉन वैरिएंट के हैं. डॉक्टर अब्दुल्ला ने कहा, लेकिन फिर भी एक तार्किक अनुमान लगाया जा सकता है कि इस डेटा से जुड़े मामले नए वैरिएंट के संक्रमण के हो सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 वॉर्ड में दाखिल अधिकांश मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ी, जैसा कि पिछली लहर में देखा गया था. 2 दिसंबर को कुल 38 मरीजों को भर्ती किया गया था. इन 38 वयस्कों में से 6 वैक्सीनेटेड, 24 अनवैक्सीनेटेड और 8 ऐसे लोग थे जिनके वैक्सीनेशन स्टेटस की कोई जानकारी नहीं थी. पूरी तरह से वैक्सीनेट केवल एक शख्स को ही ऑक्सीजन पर रखा गया. हालांकि, फेफड़ों में पल्मोनरी डिसीज के चलते इलाज की जरूरत पड़ी. इन दो सप्ताह के भीतर 2 लोगों को इनटेंसिव केयर में रखने की जरूरत पड़ी. कोविड वॉर्ड में भर्ती मरीजों में करीब 19 प्रतिशत 9 साल से ज्यादा उम्र के बच्चे थे. जबकि 28 फीसद मरीजों की उम्र 30 से 39 साल के बीच थी. कोविड वॉर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो सप्ताह में यहां किसी मरीज की मौत नहीं हुई. बता दें कि पिछले 18 महीनों में हुई कुल मौतों में बच्चों की हिस्सेदारी 17 फीसद है. यहां अब तक कुल 10 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि, इसका कारण ओमिक्रॉन नहीं माना जा रहा है. मरने वालों की संख्या बढ़ भी सकती है. अगले दो सप्ताह में काफी चीजें साफ हो जाएंगी. हालात कितने बदतर होंगे ये समझने के लिए इतना समय काफी है. बीते 18 महीनों में कोविड वॉर्ड में एडमिट रहने का औसत समय 2.8 से 8.5 दिन रहा है.
ओमिक्रॉन के मरीजों में सांस की कितनी दिक्कत, मौत का कितना खतरा? इलाज कर रहे डॉक्टरों की आई ये रिपोर्ट
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