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बेमेतरा। वन विभाग द्वारा वन्य प्राणी संरक्षण की दृष्टि से पक्षी का घोसला तैयार किया गया है। जिससे धूप एवं बरसात में पक्षी आसानी से निवास कर सके। पक्षी मित्र अभियान के तहत आम नागरिक भी गर्मी के दिनों में अपने घर के आस-पास मिट्टी के पात्र (सकोरा) में दाना पानी रख रहे हैं। पक्षियों को गर्मी से बचाना और उनके भोजन की व्यवस्था करना हम सबका नैतिक दायित्व भी बनता है। वर्तमान में मोबाईल टावर से निकलने वाले रेडिएशन के कारण गौरैया पक्षी जिसे छत्तीसगढ़ी में बाम्हन चिरई भी कहते हैं का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उपवनमण्डलाधिकारी एम.आर. साहू ने बताया कि किस प्रकार पक्षी पर्यावरण संतुलन बनाने में योगदान देते है, कीट पंतगों एवं चूहों के प्रकोप से फसल नुकसान होने से बचाने में कृषक मित्र का काम करते है, पर्यावरण संतुलित रखते है। कीटनाशकों के बढ़ते प्रयोग से पक्षियों की संख्या कम होती जा रही है वहीं कुछ प्रजातियां विलुप्ति के कगार पर हैं जो कि चिन्ता का विषय है। विशेषकर गर्मी में कम से कम एक सकोरा में पानी भर कर छायादार स्थान में रख दें। दाना-पानी की व्यवस्था कर पक्षियों को बचा सकते हैं।

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