
सपाद लक्षेश्वर धाम सलधा में आद्य जगतगुरू शंकराचार्य भगवान के प्राकट्य दिवस पर 151 बटुकों का उपनयन संस्कार ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ। जिसमें लगभग 12 जिले के लोग शामिल हुए। हमारे यहां सोलह संस्कार बताए गए हैं। गर्भाधान से लेकर अंतिम संस्कार तक जिसमें जनेऊ संस्कार एक मुख्य संस्कार माना जाता है इसके बाद वेद एवं पूजा पाठ ,यज्ञ आदि में अधिकार हो जाता है, 96 अंगुल का जनेऊ होता है जो वेद के 96 हजार मंत्रों का अधिकारी बनाता है।बटुक गुरू के सानिध्य में जाकर अपने को ईश्वर में समर्पित करता है,गुरू उनको माता पिता समाज के सेवा के सहित सारे समाज को लेकर चलने के साथ सत्मार्ग में चलते हुए परमार्थ का उपदेश देता है। प्रात: 9 बजे मंगलाचरण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ , ध्यान, संकल्प,गौरी गणेश पूजन, मुण्डन, प्रायश्चित जनेऊ धारण, हवन, गायत्री मंत्र दीक्षा, भिक्षा भोजन भंडारा के साथ, बारात, देव दर्शन के साथ सम्पन्न हुआ।



















