दंतेवाड़ा. भारत सरकार की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय अंतर्गत छत्तीसगढ़ के 8 जिले में बायोटेक किसान हब परियोजना का संचालन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के कुशल निर्देशन में किया जा रहा है। परियोजना के तहत धान की बायो फोर्टिफाइड किस्म जिंको राइस एवं छत्तीसगढ़ जिंक-1 कि खेती की जा रही है। परियोजना में धान की खेती के साथ उच्च मूल्य की सब्जी का उत्पादन, जैव उर्वरक का उचित प्रयोग तथा ब्लैक बंगाल नस्ल का बकरी पालन किया जा रहा है। खरीफ वर्ष 2021 में जिले में 150 एकड़ में जिंको धान की सफलतम खेती की गयी। खरीफ वर्ष 2022 में जिले के ग्राम पुरनतराई, बिंजाम, समलूर, सियानार, झोडियाबाड़म, रोजें, हीरानार, मटेनार, मासोडी, मुस्तलनार, कारली, कासोली एवं ग्राम हारम में बायोफोर्टिफाईड धान की किस्म छत्तीसगढ़ जिंक-1 का 50 एकड़ में तथा जिंको धान 125 एकड़ में लगाया गया है। डॉ. अभिनव साव, पौध प्रजनन एवं अनुवांशिकी विभाग, इं.गां.कृ.वि., रायपुर को परियोजना के सफल संचालन हेतु नोडल अधिकारी बनाया गया है। जिले में कृषि विज्ञान केन्द्र, दन्तेवाड़ा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. नारायण साहू के नेतृत्व में श्री डिप्रोशन बंजारा, सस्य विज्ञान तथा कु. पूनम कश्यप, वाई.पी.-2, पौध रोग विज्ञान के द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ जिंक धान-1 आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में कुपोषण को दूर करने के लिये महत्वपूर्ण है। यह देश की पहली जिंक जैव फोर्टिफाईड चांवल की किस्म है। छत्तीसगढ़ जिंक धान-1 के चांवल का दाना लंबा एवं मोटा होता है। इस किस्म में 24 पी.पी.एम. जिंक की मात्रा होती है। इसकी फसल 110-115 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है और इसका उपज 40-45 क्विंटल/हेक्टेयर आता है। वर्तमान फसल में 25-30 कंसे लगे है जिससे अच्छी उपज की संभावना बनी है। इसके चांवल के सेवन से व्यक्ति के शरीर में जिंक की आवश्यकता पूरी होती है। यह पोहा बनाने के लिये काफी उत्तम है। मनुष्य के शरीर में जिंक की कमी से शारीरिक वजन में गिरावट, बालों का झडना, डायरिया होना, आंख की रोशनी में कमी आना, सिकलिंग होना आदि लक्षण दिखाई पड़ता है। राष्ट्रीय पोषण संस्थान (एन.आई.एन.) हैदराबाद के अनुसार 1-3 वर्ष के बच्चों को 3.3 मि.ग्रा. प्रतिदिन, 13-15 वर्ष के किशोरों को 14.3 मि.ग्रा. प्रतिदिन, 13-15 वर्ष के किशोरियों को 12.8 मि.ग्रा. प्रतिदिन, 16-18 वर्ष के लड़को को 17.6 मि.ग्रा. प्रतिदिन, 16-18 वर्ष के लड़कियों को 14.2 मि.ग्रा. प्रतिदिन, पुरूषों को 17 मि.ग्रा.प्रतिदिन, गर्भवतियों को 14.5 मि.ग्रा. प्रतिदिन, शिशुवतियों को 14 मि.ग्रा. प्रतिदिन जिंक की आवश्यकता होती है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। जिंक की अत्यधिक कमी होने पर मनुष्य को गंभीर बीमारी जैसे केंसर, कीड़नी, लीवर संबंधी बीमारी होती है। गर्भवती महिलाओं को जिंक की कमी होने की संभावना बनी रहती है। अतः जिंक युक्त आहार जिंक की कमी को दूर करने का उचित माध्यम है। यह किस्म मध्यम अवधि (110-115 दिन) का होने के कारण जिला दन्तेवाड़ा के लिये अनुकुल है। छत्तीसगढ़ जिंक धान-1 में अन्य धान के तुलना में कीट एवं रोग का प्रकोप कम पाया जाता है। केन्द्र के वैज्ञानिको द्वारा समय-समय पर धान की बायोफोर्टिफाईड किस्म कि खेती का प्रशिक्षण दिया जाता है। जिसके तहत धान कि सस्य क्रिया, उचित मात्रा में जैव उर्वरक देना, कीट एवं रोग के लिये सावधानी बरतने की जानकारी भी दी जाती है। इस किस्म के अच्छे बढ़वार एवं स्वस्थ्य पौधे को देखकर अच्छी उपज आने की संभावना है। जिसे देखकर कृषक काफी उत्साहित है।
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