हमारे पिता नेत्रहीन थे. हम तीन भाई-बहन भी नेत्रहीन पैदा हुए. इस तरह हमारी तीन पीढ़ी में कुल 19 लोग आँख की रौशनी के बग़ैर पैदा हुए. पहले हमें लगता था कि अल्लाह ने हमें ऐसा ही बनाया है. लेकिन जब चिकित्सकों ने हम लोगों के परिवार की जेनेटिक जांच करवाई तब जाकर पता चला कि सालों से हमारे घर में नेत्रहीन बच्चे क्यों पैदा हो रहे थे.” जन्म से नेत्रहीन 54 साल के मोहम्मद इसहाक़ अली बड़ी बेबसी और उम्मीद के साथ ये बातें कहते हैं. मोहम्मद इसहाक़ की बेबसी तीन पीढ़ी से उनके परिवार में पैदा हो रहे नेत्रहीन सदस्यों को लेकर थी.

2018 में चिकित्सकों की एक टीम ने जेनेटिक जांच करके उस बीमारी का पता लगा लिया, जिससे आने वाले समय में इनके परिवार में दृष्टिहीन बच्चे के जन्म को रोका जा सकता है. इसके बाद परिवार को एक उम्मीद की किरण दिखी. उन्हें लगा कि आने वाली पीढ़ी में कोई नेत्रहीन पैदा नहीं होगी.ये जानने के लिए परिवार के इतिहास और वर्तमान को बीबीसी ने उनके गाँव जा कर खंगालने की कोशिश की.असम के इसहाक़ परिवार की कहानी
असम के इस नेत्रहीन परिवार के सबसे बुज़ुर्ग सदस्य अब्दुल वाहिद कहते हैं, “मैंने कभी जांच नहीं करवाई क्योंकि मुझे पता था कि हम जन्म से नेत्रहीन हैं. यह हमारे खानदान में है. इसलिए सोचा जांच कराने से क्या हासिल होगा. लेकिन अब हमें इस बीमारी के बारे में पता चला है.”

मोहम्मद इसहाक़ अली का परिवार उत्तर-पूर्वी राज्य असम के नगांव ज़िले के एक छोटे से गाँव उत्तर खाटवाल में बसा है. उत्तर खाटवाल, गुवाहाटी से राष्ट्रीय राजमार्ग-37 पर क़रीब 150 किलोमीटर दूर है. मोहम्मद इसहाक़ के गाँव तक जाने वाली इस कच्ची सड़क पर जगह-जगह मौजूद गड्ढे और उन गड्ढों में भरे पानी के मंज़र को देखकर ये अहसास हो जाता है कि इस इलाके़ के ग्रामीणों के लिए शहर तक पहुंचना कितना मुश्किल है.इस परिवार की मजबूरी ये है कि इसके ज़्यादातर सदस्य नेत्रहीन होने की वजह से अशिक्षित हैं और सामान्य व्यक्ति की तरह रोज़ाना के अपने काम करने में असमर्थ हैं. इस कारण वे गाँव से दूर दूसरे शहरों में भीख मांग कर अपने परिवार का पेट पालते हैं.

अपने परिवार में नेत्रहीन सदस्यों के बारे में जानकारी देते हुए मोहम्मद इसहाक कहते हैं, “मेरे पिता नेत्रहीन पैदा हुए थे. हमने सुना था कि हमारी दादी भी नेत्रहीन थीं. यह सालों पुरानी बात है. हम तीन भाई और एक बहन नेत्रहीन पैदा हुए. बहन कीकी शादी नहीं हुई. लेकिन हम भाइयों ने शादी की तो हमारे ज़्यादातर बच्चे नेत्रहीन पैदा हुए. जबकि हमारी पत्नियां देख सकती हैं.” “मेरे बड़े भाई अब्दुल वाहिद के चार बेटे हैं. इनमें तीन नेत्रहीन हैं. मेरे ख़ुद के सात बच्चे हैं. इनमें दो जन्म से नेत्रहीन हैं और पांच को अल्लाह ने रोशनी दी है. मेरे छोटे भाई आकाश अली के पांच बच्चे हैं जिनमें तीन देख नहीं सकते. मेरे छह नेत्रहीन भतीजों के यहां भी पांच बच्चे नेत्रहीन पैदा हुए. मेरी बेटी की दो संतान भी नेत्रहीन हैं. इस तरह हमारे 33 लोगों के परिवार में कुल 19 लोग नेत्रहीन हैं.”डॉक्टरों की नज़र में परिवार
मोहम्मद इसहाक़ का परिवार सालों से पीढ़ी दर पीढ़ी जिस दृष्टिहीनता को अपनी किस्मत मान कर चल रहा था उसका हल चिकित्सकों ने अध्ययन और क्लीनिकल जांच के ज़रिए खोज निकाला.

इस परिवार को तलाश कर उनका जेनेटिक जांच करवाने वाली असम के लखीमपुर मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. गायत्री गोगोई ने बीबीसी से कहा, “मैंने 2018 में जब एक न्यूज़ चैनल के टीवी स्क्रीन पर इस परिवार के कुछ दृष्टिहीन लोगों को ध्यान से देखा तो उन सबकी आंख के सॉकेट के अंदर नेत्रगोलक अर्थात आई बॉल था ही नहीं. वो सभी दिखने में एक जैसे थे. इसलिए बतौर चिकित्सक मुझे ऐसा लगा कि ये सभी लोग आंख से जुड़ी एक ही तरह की बीमारी से ग्रस्त हैं.” “मैं कैंसर जेनेटिक जांच विधि में प्रशिक्षित हूं, इसलिए मेरे दिमाग में आया कि हो सकता है ये सभी लोग किसी अनुवांशिक बीमारी के शिकार हों. मैंने उनके गांव के स्थानीय विधायक नुरुल हुड्डा और कुछ पहचान के लोगों से इस परिवार के बारे में बात की और परिवार को काउंसलिंग कर जेनेटिक जांच के लिए तैयार किया.”

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