कोण्डागांव। चुनौतियों को अवसर में बदलना ही सफलता का मूल मंत्र है। और यह जगजाहिर है कि नारी शक्ति द्वारा इस मूल मंत्र को बखूबी निभाया जाता रहा है। विकासखण्ड कोण्डागांव के ग्राम बोलबोला की वे महिलाएं जिन्होने खेती किसानी और घर गृहस्थी के अलावा अन्य किसी कार्य के लिये अपने घर की देहरी नहीं लांघी थी। आज वही ग्रामीण महिलाएं नये स्वरोजगार के क्षेत्र में प्रवेश कर स्वालम्बन की नई इबारत लिख रहीं है। जनपद पंचायत कोण्डागांव से लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत बोलबोला की कुल आबादी 1932 और परिवार संख्या 397 है। जिसमें से 245 परिवार छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़े हुये है। इस छोटे से ग्राम में वर्तमान में कुल 29 महिला स्व-सहायता समूह का गठन किया जा चूका है। इन समूहों में बम्लेश्वरी स्वसहायता समूह, गायत्री महिला स्व.सहा.स., महिला बचत स्व.सहा.स., शीतला माता स्व.सहा.स., शारदा स्व.सहा.स., मॉ पार्वती स्व.सहा.स., धनलक्ष्मी स्व.सहा.स., एकता स्व.सहा.स., तुलसी स्व.सहा.स., वैष्णवी माता स्व.सहा.स., दुर्गा स्व.सहा.स., उजाला स्व.सहा.स., नई रौशनी स्व.सहा.स., दंतेश्वरी नायडू स्व.सहा.स., जलनी स्व.सहा.स., मॉ दंतेश्वरी स्व.सहा.स., राधाकृष्णा स्व.सहा.स., सरस्वती स्व.सहा.स., जय मॉ माया देवी स्व.सहा.स., प्रगति स्व.सहा.स., मॉ हिंगलाजीन माता स्व.सहा.स. प्रमुख है जिन्होने छ.ग राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर समूह के लिये आत्मनिर्भरता का मार्ग ढूंढा है। यहां बताना जरूरी होगा कि ये सभी सदस्य महिलाएं पूर्ण रूप से घरेलु और खेतीहर है। जो पूर्व में परम्परागत खेती किसानी कार्य में ही व्यस्त रहतीं थी। जाहिर है परम्परागत कृषि से प्राप्त आय में परिवार का मात्र भरण-पोषण ही हो पाता है। परन्तु आज वहीं महिलाएं बिहान से जुड़कर आजीविका के नये-नये रास्ते ढूंढ लिये हैं।
स्वरोजगार के सोपान पर कदम दर कदम बढ़ाती हुई महिलाएं
महुआ का उपयोग आम तौर पर स्थानीय ग्रामीणों द्वारा देशी मदिरा बनाने में प्रयुक्त किया जाता है, परन्तु बहुत कम लोग जानते हैं कि महुआ की उपयोगिता केवल यहीं तक सीमित नहीं है। बल्कि महुआ के फूल और फलों में विटामिन, आयरन और अन्य पौष्टिक तत्वों की अधिकता होती है जो शरीर के लिये आवश्यक होते हैं। इससे बने खाद्य पदार्थ जैसे लड्डू एवं पाउडर विशेष तौर पर ब?ते हुए बच्चों एवं गर्भवती माताओं में कुपोषण को दूर करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इस क्रम में ग्राम बोलबोला के धनलक्ष्मी स्व-सहायता समूह के सभी सदस्य द्वारा महुआ लड्डू का निर्माण कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में समूह द्वारा महुआ को क्रय कर 35 किलो महुआ लड्डू तैयार कर उसका विक्रय भी किया गया है। इस संबंध में सदस्य महिलाओं ने बताया कि महुआ लड्डू प्रति नग 5 रूपये की दर से एवं प्रतिकिलो 500 रूपये की दर से विक्रय किया जाता है। इस प्रकार कुल 35 किलो लड्डू तैयार समूह को 17500 रूपये की राशि प्राप्त हुई है। मुर्गी पालन तो सदैव ही स्वरोजगार का प्रमुख घटक रहा है। अत: ग्राम बोलबोला के प्रगति महिला स्व-सहायता समूह द्वारा मुर्गी पालन का कार्य किया जा रहा है। रूर्बन मिशन अंतर्गत उक्त महिला स्व-सहायता समूह को शेड निर्माण भी कर दिया गया है। जिसमें समूह द्वारा मुर्गी पालन कर विक्रय किया जाता है। साथ ही एक अन्य महिला स्व-सहायता समूह बचत द्वारा सूकर पालन का कार्य संचालित है। इस संबंध में उन्हें मनरेगा के तहत् शेड निर्माण और पशुधन विभाग द्वारा 16 सूकर प्रदाय किया गया है। राज्य शासन द्वारा अभी हाल ही में शुभारम्भ की गई गोधन न्याय योजना के संचालन में भी महिला स्व-सहायता समूहों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अंतगत समूह की महिलाएं गोठानों में ग्रामीणों द्वारा लाये गये गोबर एकत्रण कर वर्मी कम्पोस्ट बनाने का कार्य करके एक नये रोजगार की ओर कदम बढायेंगी। इससे तहत् ग्राम बोलबोला में नई रोशनी महिला स्व-सहायता द्वारा गोधन न्याय योजना के तहत् वर्मी कम्पोस्ट खाद निर्माण का कार्य प्रारम्भ किया गया है। और इस समूह की महिलाएं पशुपालकों से 2 रूपये किलो में गोबर खरीद कर जैविक खाद का निर्माण कर रहीं है। इसी प्रकार ई-रिक्शा संचालन निश्चय ही ग्रामीण महिलाओं के लिए एक नया कार्य क्षेत्र है। इसमें भी तुलसी स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती संतोषी नेताम द्वारा सफलता पूर्वक ई-रिक्शा का संचालन किया जा रहा है। उन्हें माह दिसम्बर 2018 में रूर्बन अंतर्गत ई-रिक्शा प्रदाय किया गया है। संतोषी नेताम को ई-रिक्शा प्रदाय करने से पूर्व लाईवलीहुड कॉलेज के माध्यम से ई-रिक्शा चलाने का प्रशिक्षण दिया गया। तत्पश्चात् आजीविका मिशन के माध्यम से उन्हे 165000 श्रम विभाग द्वारा 50000 तथा स्वयं के द्वारा 8000 की राशि से ई-रिक्शा दिया गया। वर्तमान में वे अपने ई-रिक्शा से ग्राम पंचायत बोलबोला से मुख्यालय कोण्डागांव तक प्रतिदिन यात्रियों को लाती लेजाती है। इसके अलावा बोलबोला में मिशन द्वारा सभी समूहों के परिवार के एक सदस्य को संवाहनीय कृषि परियोजना से जोड़ा गया है। परियोजना के तहत् परिवारों को उन्नत खेती हेतु टुलबैंक प्रदाय किया गया है। जिसका महिलाएं अपनी खेती में उपयोग कर कम परिश्रम में अधिक कार्य कर पा रहीं है। साथ ही प्रत्येक सदस्य के यहां एक किचन गार्डन भी तैयार किया गया है। इस प्रकार आत्मनिर्भर बनकर ग्राम बोलबोला की महिलाएं अपने घर के आमदनी में बराबरी का हिस्सा बटा रहीं है। इससे उनके घर-परिवार के जीवन स्तर में सुधार और समाज में सम्मान भी बढ़ा है। ग्रामीण आत्मनिर्भर महिलाओं का यह नया अवतार वास्तव मे स्वागत योग्य होने के साथ-साथ समाज के लिये एक प्रेरणा स्त्रोत भी है। और जिस उत्साह से इन सभी कार्य क्षेत्रों में महिलाएं बखुबी अपनी भूमिका निभा रहीं है इसने निश्चित रूप से उन प्रचलित धारणों और मान्यताओं को झूठलाया है, जो यह मानती थी कि महिलाएं सिर्फ घर-परिवार ही सम्भाल सकती हैं।

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