• चन्द्रभूषण वर्मा
    छत्तीसगढ़ में पहली बार ‘राष्ट्रीय रामायण महोत्सवÓ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। बताया जा रहा कि इस राष्ट्रीय महोत्सव में देश के 12 राज्यों सहित कंबोडिया और इंडोनेशिया के रामायण दलों द्वारा रामकथा पर भक्तिपूर्ण प्रस्तुति दी जाएगी। साथ ही रामायण के अरण्य काण्ड पर रामायण दलों की प्रतियोगिता प्रतिदिन आयोजित की जाएगी। ख्याति प्राप्त कलाकार भजन संध्या में अपनी संगीतमय प्रस्तुति देंगे। रामलीला मैदान में तीन दिनों तक रामकथा की अविरल भावधारा बहेगी। इस राष्ट्रीय महोत्सव में केरल, कर्नाटक, ओडि़सा, असम, गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखण्ड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के रामायण दल शामिल हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ के लोक गायक दिलीप षड़ंगी अपनी टीम के साथ महोत्सव के तीनों दिन हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इसके साथ ही साथ प्रतिदिन रात्रि में भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के सुप्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
    छत्तीसगढ़ में हो रहा राष्ट्रीय रामायण महोत्सव श्री राम के आदर्श चरित्र को बारीकियों से जानने का दुर्लभ अवसर है। ऐसा आयोजन, वो भी राष्ट्रीय स्तर पर विरले ही होता है। महोत्सव के माध्यम से हम श्रीराम के आदर्श चरित्र की बारीकियों को जान सकेंगे। ऐसा चरित्र जिसने सात समंदर पार के द्वीपों को भी प्रभावित किया। जावा, बाली जैसे द्वीपों ने सैकड़ों बरसों से इन स्मृतियों को संभाल कर रखा है। यह उनकी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। छत्तीसगढ़ में हम जान सकेंगे कि किस तरह से अपनी बोली-भाषा में यह देश हमारे महापुरुष की स्मृतियां सजा कर रखे हुए हैं जिन्होंने उनकी जाति को भी श्रेष्ठ जीवन मूल्यों की सीख दी। रामायण की कथा हमको संस्कारित करती है। इसे बार-बार सुनना हमें अपने आदर्शों की ओर लगातार बढऩे के लिए प्रेरित करता है। भगवान श्रीराम का भी वनगमनपथ ऐसा ही रहा है उन्होंने लंका विजय की और इस दौरान देश की अनेक जातियों के लोगों से मिले, उनसे संवाद किये। अरण्य कांड में ऋषियों से चर्चा की। यह सब हमारी सुखद स्मृतियों का हिस्सा है।
    छत्तीसगढ़ सरकार का यह आयोजन काफी सराहनीय है। इससे पहले अप्रैल महीने में भगवान श्रीराम के ननिहाल और माता कौशल्या की नगरी चंदखुरी में राज्य शासन के संस्कृति विभाग द्वारा माता कौशल्या महोत्सव-2023 का आयोजन किया गया था। इसमें देश और प्रदेश के जाने-माने कलाकारों ने तीनों दिन मानस गान, भक्ति गीत, नृत्य और भजन प्रस्तुत किया। माता कौशल्या की जन्मभूमि चंदखुरी के वैभव को विश्व पटल पर स्थापित करने और यहां की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देने राज्य शासन द्वारा इस राष्ट्रीय महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
    छत्तीसगढ़ में भांजे के रूप में पूजे जाते हैं श्री राम
    भगवान राम वैसे तो पूरी दुनिया में कई रूपों में पूजे जाते हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में भगवान राम को भांजे के रूप में पूजा जाता है। क्योंकि कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ भगवान राम का ननिहाल है। राम जी की माता कौशल्या का जन्म छत्तीसगढ़ में हुआ था। यही नहीं राम जी ने अपने वनवास के 12 साल भी छत्तीसगढ़ में ही बिताए थे। वैसे राम भगवान से जुड़ी कई मान्यताएं यहां प्रमाणित हैं। माना जाता है कि भगवान राम के वनवास के 12 साल इसी प्रदेश में गुजरे थे। सरगुजा से लेकर बस्तर जिसे दण्डकारण्य कहा जाता है, वहां तक राम जी के वनवास से जुड़ी कथा और प्रमाण देखे जा सकते हैं।
    कुल मिलाकर देखा जाए तो जहां श्री राम की पूजा भांजे के रूप में होती हो, वहां राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। हमारी युवा पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आर्दशों को समझने और बारीकियां सीखने यह दुर्लभ अवसर है।
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