अमलेशवर. नए शिक्षण सत्र का आगाज अभी अभी ही हुआ है, कही कही तो स्कूल का ठीक से साफ सफाई भी नहीं हुआ हैं, बच्चे भी ठीक से अभी अपने स्कूल ड्रेस को भी व्यवस्थित नहीं कर पाये हैं, और स्कूलो में पढाने वाले हमारे सम्माननीय शिक्षको का एक दिवसीय हडताल 7 जून को छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक संघ ने अपना फ़रमान काम बंद, शाला बंद जारी कर दिये हैं। आंदोलन का मुख्य वजह वेतन में वृद्धि करना ही हैं । इस 7 जुलाई को स्कूल तो खुलेंगे पर शिक्षक अनुपस्थित रहेगें तब हमारे छोटे छोटे मासूम नव प्रवेशी बच्चों का जिसका अभी अभी शाला प्रवेश उत्सव कर उसका तिलक पूजा कर उसका मुंह मीठा भी किये हैं ,को पता चलेगा कि आज हमारे गुरू जण अपने वेतन वृद्धि को लेकर हडताल पर हैं। तब इस दिन से इन बच्चो को भी पता चलेगा कि अ से अनार के साथ आंदोलन भी होता हैं, वही ह से हल, हवाई जहाज के साथ हडताल भी होता हैं। शिक्षको का स्कूल खुलते ही इतनी जल्दी आंदोलन करने का एक कारण वर्तमान सरकार का कार्यकाल बहुत ही संक्षिप्त समय सिर्फ 4 – 6 माह ही शेष बचा होना हो सकता हैं। और ये समय सत्ता पक्ष के लिए बहुत ही संवेदनशील रहता हैं सभी कर्मचारी संघ अपने छोटे बडे मांगो को शासन को अवगत कराते हैं या सीधी सीधी बातें करे तो शासन का आखिरी 4 – 6 माह कर्मचारियों का समय धरना प्रदर्शन का ही रहता हैं। स्कूल के खुलते ही शिक्षको का आंदोलन करने से बच्चो व पालको का शिक्षको के प्रति नाराजगी व नकारात्मक भाव पैदा हो सकता हैं ,क्योकि स्कूल खुलते ही बच्चो का पढाई प्रभावित हो ऐसा कोई भी पालक नहीं चाहेगा। शासन को भी इस दिशा में जल्द ही सकारात्मक कदम तुरंत उठाना चाहिये जिससे हर हाल में भी गरीब बच्चो की पढाई प्रभावित ही न हो। वहीं हमारे छत्तीसगढ़ राज्य डाट काम के संवाददाता ने शिक्षक के हडताल किये जाने को लेकर क्षेत्र के अलग पालको से मिलकर उनका विचार जानना चाहा तो बहुत से पालको में शिक्षको के प्रति नाराजगी देखने को मिला ।
अमलेशवर से सामाजिक कार्यकर्ता डाँ अश्वनी साहू ने कहा कि स्कूल खुलते ही शिक्षको के हडताल पर चले जाना नये सत्र के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता हैं, साथ ही बच्चो के मन में भी शिक्षको के प्रति भाव व्यवहार बदल सा जायेगा । धरना प्रदर्शन, आंदोलन से मांगे पूरी होने से बच्चे भी अपने आवश्यकता पूरी नहीं होने से आगे चल कर जिद्दी व हठी हो सकते हैं। तेलीगुण्डरा ( पाटन) से पालक हेमंत यादव ने भी उचित नहीं माना और कहा कि नवीन सत्र चालू होते ही आंदोलन करने के पहले कुछ दिन बाद करने को उचित बताया। वहीं रायपुर से पालक पवन साहू ने शिक्षको से छुट्टी के दिनो में धरना प्रदर्शन को उचित बताया और कहा कि ऐसा करने से बच्चो का पढाई प्रभावित नहीं होगा और कहा कि यदि हमारे मांग जायज व हमारे संगठन मजबूत हो तो सरकार छुट्टी के दिनो में भी उसे कर्मचारियों को पूछना ही पड़ेगा। तो कुछ पालको ने अपना विचार व्यक्त करते हुये कहा कि जिस दिन इस तरह की हडताल होता हैं तो पढे लिखे युवको व सामाजिक संस्था के लोगों को अपने आस पास के स्कूलो में जाकर बच्चों को पढाने के साथ ही आगे बढने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

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