चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को अपने सम्मान से कभी भी कोई समझौता नहीं करना चाहिए। व्यक्ति धन और संसाधनों से कितना ही परिपूर्ण क्यों न हो यदि उसका सम्मान नहीं है तो वह व्यर्थ ही है। शास्त्रों के अनुसार मनुष्य का जन्म व्यक्ति को कई पुण्य कार्यों के बाद प्राप्त होता है। इसलिए इस मानव जन्म के महत्व को जानना और समझना चाहिए। मनुष्य के कार्यों में जन कल्याण की भावना होनी चाहिए। जिस व्यक्ति के कार्यो में जन कल्याण की भावना नहीं होती है ऐसे व्यक्ति का कोई भी सम्मान नहीं करता है। समाज में सम्मान पाना चाहते हैं तो चाणक्य की इन बातों को कभी नहीं भूलना चाहिए।
सम्मान देने से प्राप्त होता
चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को सम्मान देने से प्राप्त होता है। जो व्यक्ति दूसरे के हितों का ध्यान रखता है। पद, प्रतिष्ठा और बिना लोभ के जो दूसरों को सम्मान दे, ऐसे व्यक्ति का हर कोई आदर और सम्मान करता है। ऐसे व्यक्ति समाज में वंदनीय होते हैं। समाज ऐसे लोगों को उदाहरण के तौर पर देखता है। इसलिए सम्मान पाना चाहते हैं तो दूसरों को भी उतना मान सम्मान दें जितना आप दूसरों से सम्मान के मामले में उम्मीद रखते हैं।
अंहकार से दूर रहें
अंहकार व्यक्ति को बर्बाद कर देता है। अंहकार व्यक्ति की बुद्धि का नाश करता है। व्यक्ति की सोचने और समझने की शक्ति क्षीण हो जाती है। अंहकार में व्यक्ति अनुचित कार्य करता है और उसे इसका पता भी नही चलता है। अंहकारी व्यक्ति अपने शत्रुओं की संख्या निरंतर बढ़ाता रहता है। समय आने पर अंहकारी व्यक्ति अकेला रह जाता है और सभी करीबी उसका साथ छोड़ जाते हैं। इसलिए सम्मान प्राप्त करना चाहते हैं तो अंहकार से दूर रहें।
अनुशासन को न भूलें
चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को सदैव अनुशासन का पालन करना चाहिए। जो व्यक्ति संबंधों के मामले में अनुशासन का ध्यान नहीं रखता है, उसे अपयश भोगना पड़ता है। (एजेंसी)
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