आजकल टमाटर को किसी सुपरस्टार से कम नहीं माना जा रहा है. चारो ओर टमाटर ही सुपरस्टार की तरह छाया हुआ है. सोशल मीडिया पर भी हर तरह की पोस्ट में सिर्फ टमाटर ने ही कब्जा किया हुआ है. टमाटर पर तरह-तरह की मीम बनाई जा रही है. घरों में औरते अपने आभूषणों से ज्यादा संभाल कर टमाटर को रख रही है. इस सबसे तो आपको मालूम हो गया होगा कि ऐसा सिर्फ इसलिए क्योंकि टमाटर के दाम आसमान छू रहे हैं. आपको बता दें कि टमाटर के महंगा होने का मुख्य कारण है कि टमाटर की सेल्फ लाइफ बहुत कम होती है. लेकिन हम यहां आपको लम्बी शेल्फ लाइफ वाले टमाटर के बारे में बताएंगे. जी हां, आपको जानकर हैरानी होगी कि एक ऐसी किस्म के टमाटर भी होते है जो 45 दिन तक खराब नहीं होते हैं. आइए जानते हैं.
abplive.com की खबर के अनुसार, लम्बी शेल्फ लाइफ वाले टमाटर की इस खास किस्म का नाम “FLAVR SAVR TOMATO” है. इन टमाटरों को आमतौर पर “फ्लेवर सेवर” के नाम से जाना जाता है. जेनेटिक इंजीनियरिंग की भाषा में इसे CGN- 89564- 2 कहा जाता है.
फ्लेवर सेवर टमाटर को किसने विकसित किया
आमतौर पर टमाटरों की शेल्फ लाइफ बहुत कम होती है और टमाटर काफी जल्दी पक जाते हैं. इसी बात को ध्यान में रखते हुए टमाटर को जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से जीन साइलेंसिंग की टेक्निक द्वारा बनाया गया है. कैलिफ़ोर्निया की कैलगेन कंपनी ने टमाटर के नेचुरल कलर और टैस्ट में बदलाव लाए बिना उसके जल्दी से पकने की प्रक्रिया को धीमा कर दिया गया.
फ्लेवर सेवर टमाटर के जल्दी ना पकने का कारण
टमाटर की सेल वॉल (कोशिका भित्ति) पेक्टिन की बनी होती है. जिसमें पीजी जीन पाई जाता है जो कि एक प्रोटीन पॉलीगैलेक्टुरोनेज़ एंजाइम है. पॉलीगैलेक्टुरिक एसिड के कारण टमाटर की सेल वॉल में मौजूद पेक्टिन वॉल सॉफ्ट हो जाता है. इसी कारण टमाटर पक जाते हैं लेकिन जीन मेथड द्वारा इस पीजी जीन को साइलेंट या सुप्रेस कर दिया जाता है जिस के कारण इन टमाटरों के अंदर यह प्रोटीन नहीं बनती है और यह ना जल्दी पकते है और ना ही जल्दी खराब होते हैं.

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