देश आज स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मना रहा है और इसके जश्न में डूबा हुआ है। स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर लगातार 10वीं बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देशवासियों को संबोधित किया और ये ऐलान भी किया कि वो अगले वर्ष फिर से देशवासियों को संबोधित करेंगे। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देने के साथ की। इस दौरान उन्होंने तीन बुराईयों भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टीकरण का जिक्र किया और इन्हें को लोकतंत्र की तीन ऐसी विकृतियां करार दिया, जिनसे देश तथा समाज का बहुत नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि इन तीनों ‘बीमारियों’ के खिलाफ उनकी जंग जारी रहेगी। लाल किले की प्राचीर से 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने की राह में अगर कुछ रुकावटें हैं तो ये विकृतियां ही हैं। उन्होंने कहा, ”पिछले 75 सालों में कुछ विकृतियां ऐसे घर कर गई हैं, हमारी सामाजिक व्यवस्था का ऐसा हिस्सा बन गई हैं…। कभी-कभी तो हम आंख भी बंद कर लेते हैं। लेकिन अब आंखें बंद करने का समय नहीं है। संकल्पों को सिद्ध करना है तो हमें आंख-मिचौली खत्म करके, आंख में आंख डालकर तीन बुराइयों से लडऩा है। यह समय की बहुत बड़ी मांग है। मोदी ने कहा कि हमारे देश की सभी समस्याओं की जड़ में भ्रष्टाचार है, जिसने दीमक की तरह देश की सारी व्यवस्थाओं को, देश के सामर्थ्य को पूरी तरह नोच लिया है। उन्होंने कहा, ”भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए लड़ाई जारी रहेगी। यह मोदी के जीवन की प्रतिबद्धता है। मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ता रहूंगा।” राजनीति में परिवारवाद का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसने देश को लूट लिया है और तबाह किया है। उन्होंने कहा, ”इसने जिस प्रकार से देश को जकड़ कर रखा है, उसने देश के लोगों का हक छीना है।” तुष्टीकरण को ‘तीसरी बुराईÓ करार देते हुए मोदी ने कहा कि इसने देश के मूलभूत चिंतन और सर्वसमावेशी राष्ट्रीय चरित्र को दाग लगाया है और उसे तहस-नहस कर दिया है। बगैर किसी राजनीतिक दल का नाम लिए उन्होंने कहा, ”इन लोगों ने देश का बहुत नुकसान किया है। इन तीनों बुराइयों के खिलाफ पूरे सामर्थ्य के साथ लडऩा है। भ्रष्टाचार, परिवारवाद, तुष्टीकरण देश के लोगों की आकांक्षाओं का दमन करते हैं।” इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि गरीब हों, दलित हों, पिछड़े हों, पसमांदा हों या फिर आदिवासी भाई-बहन, इनके हक के लिए तीनों बुराइयों से मुक्ति पानी है। उन्होंने कहा, ”हमें भ्रष्टाचार के खिलाफ नफरत का माहौल बनाना है। जैसे हमें गंदगी पसंद नहीं है तो हम उससे नफरत करते हैं। सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार से बड़ी गंदगी नहीं हो सकती है। इसलिए हमारे स्वच्छता अभियान को एक नया मोड़ देते हुए भ्रष्टाचार से मुक्ति पाना है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले सालों में सरकार ने भ्रष्टाचारियों की जो संपत्ति जब्त की है वह पहले की तुलना में 20 गुना ज्यादा है। उन्होंने कहा, ”आपकी कमाई का यह पैसा लोग लेकर भागे थे। 20 गुना ज्यादा संपत्ति को ज़ब्त करने का काम किया है हमने। इसलिए ऐसे लोगों की मेरे प्रति नाराजगी होना स्वाभाविक है। लेकिन मुझे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को आगे बढ़ाना है।”मोदी ने कहा कि ये तीनों विकृतियां भारत के लोकतंत्र को कभी मजबूती नहीं दे सकतीं। उन्होंने कहा ”यह बीमारी है। परिवारवादी पार्टियों का मंत्र है परिवार का, परिवार के द्वारा और परिवार के लिए। परिवारवाद और भाई भतीजावाद प्रतिभाओं के दुश्मन होते हैं। परिवारवाद से मुक्ति इस देश के लोकतंत्र के लिए जरूरी है। सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय यानी हर किसी को उसका हक मिले। इसलिए सामाजिक न्याय के लिए भी यह बहुत जरूरी है।” प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और परिवारवाद को विकास का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए कहा, ”अगर देश विकास चाहता है, अगर देश 2047 में विकसित भारत का सपना साकार करना चाहता है, तो हमारे लिए आवश्यक है कि हम किसी भी हालत में देश में इन्हें सहन नहीं करेंगे।

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