रायपुर। मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा ने ईडी की छापेमारी को डकैती बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए है.उन्होंने कहा कि मेरे घर में ईडी की डकैती हुई है. छापेमारी के दूसरे दिन विनोद वर्मा ने रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ईडी और बीजेपी पर कई गंभीर आरोप लगाए है. उन्होंने गिरफ्तार एएसआई चंद्रभूषण वर्मा से किसी भी तरह के रिश्ते से इंकार किया है और ईडी की रेड के पीछे आधार पर भी बड़ा दावा किया है. उन्होंने बताया है कि एक पत्रिका में छपे कहानी के आधार पर ही ईडी ने छापा मारा है. इसके साथ विनोद वर्मा ने ईडी पर डकैती करने का आरोप लगाया है. उन्होंने प्रदेश कांग्रेस भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि मेरा पत्रकारिता का जीवन बहुत बड़ा है राजनीति का जीवन छोटा है मेरे घर में जो धूल है वो मेरे ही पैर की है. मेरे पास कुछ भी नहीं है जिस पर आप शक कर सके और मेरे घर में बुधवार को डकैती हुई है, लूट हुई है. ईडी ने जो मुझसे बयान लिया है उसमे में भी मैने दर्ज करवाया है. आप मुझे प्रताडि़त कर रहे है. विनोद वर्मा में बताया कि जितना सोना मेरे घर मिला है 2005 से 2023 तक का है. मैने 2005 से पहली बार सोना खरीदा था. मैं खरीदने लायक तभी हो पाया था. मैने एक गहने का बिल दिया है. एक गहने का बिल नहीं था जो मेरी पत्नी को शादी में मिला था. इसके अलावा 6 अतिरिक्त बिल मैने दिया है. इसके भांजे और भतीजे के शादियों में गहना दिया है. मेरे घर में 6 सदस्य है और सभी अर्निंग करते है. इसके अलावा घर से जो गहने लेकर गए है उसमे से आधे गहने है वो किस्तों पर खरीदी गई है. ये हमने मेरी पत्नी के जन्मदिन और शादी की सालगिरह पर खरीदी है. ईडी वालों ने 2 लाख 55 हजार 300 रुपए नगद लेकर गए है. घर का कोना कोना छान मारा, मेरे बेटे की शादी में जो लिफाफा मिला था उन लिफाफों को खोलकर सारे पैसे ले गए लेकिन हिसाब नहीं बनाया. लेकिन मेरे बेटे ने इन लिफाफों का पूरा सबूत ईमेल पर रखा हुआ था. किस लिफाफे में कितना पैसा मिला और किसने दिया है. उन्होंने इसके बाद कहा आप मुझे संतुष्ट नहीं कर पा रहे है. तो जो अधिकारी आपके घर छापा मारने आया है उसकी मंशा क्या है? ये ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है. बजाए इसके वो सबूत क्या मांग रहा है. हर उस चीज का सबूत दिया जिसका उनको चाहिए था मैंने दिया है. आपके घर में आपके पूरे कागज है उसके साबित है उसके बाद कह रहे है आप सबूत दे दीजिए. तो सवाल ये है की इसे अब रहजनी और डकैती के अलावा क्या कहा जाए? इसके अलावा मैंने उनसे पूछा की कितना गहना रख सकते है तो उन्होंने कहा कि आईटी एक्ट में है, ईडी एक्ट में नहीं है. उन्होंने कहा आपने ये बिल कैसे पे किया है इसके सबूत आपके पास नहीं है. भारतीय कानून में पहली बार ये प्रावधान जोडऩा पड़ रहा है. अगर आप कोई चीज बिल से खरीदते है नगद से नहीं खरीदते है. तो उस बिल के पेमेंट का मोड भी आपको सुरक्षित रखना पड़ेगा. ये आईपीसी और सीआरपीसी को नए सिरे से परिभाषित कर रहे है. भारत सरकार का नियम है कि 49 हजार से ज्यादा का खरीदी करते है तो पैन कार्ड अटैच करना पड़ता है. यानी मैने प्लास्टिक मनी से पे किया है या बैंक से ट्रांसफर किया है. इस छापे का आधार बताते हुए विनोद वर्मा ने कहा कि एक पत्रिका में छपी मनोरम कहानी के आधार पर ही हुई है. इसमें दावा किया गया है की कोई रवि उत्पल है जो मेरे बेटे के ससुराल तरफ से रिश्तेदार है और चंद्रभूषण वर्मा है जो मेरे रिश्तेदार है. उनकी मेरी सहायता से ये पूरा रैकेट चलाया जाता है. फिर इस पत्रिका के खिलाफ मैंने 21 दिसंबर 2022 को दुर्ग एसपी और डीजीपी को लिखित शिकायत दी गई है और जांच की मांग की थी. इसपर मैंने पुलिस से कहा था कि जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हूं. इसी कहानी को सुनकर ईडी वाले आए थे. इस पत्रिका के खिलाफ मैं पर्याप्त कानूनी कार्रवाई करने जा रहा हूं. इसकी शुरुआत हो चुकी है. चंद्रभूषण वर्मा मेरा रिश्तेदार नहीं है, दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का रिश्तेदार नहीं है. मेरी एक बार ढाई साल पहले मेरे ऑफिस में मुलाकात हुई थी. मैंने उससे कहा था मेरा नाम लेकर कुछ करते है हो तो मैं तुमको नौकरी से हटवाऊंगा और जेल भी भिजवाऊंगा. उसके बाद से मेरे दफ्तर आया नहीं आया है. ईडी को पहले जांच कर लेना था फिर मेरे घर आना था. लेकिन अब ईडी इस तरह हो गई है कि कोई बोले कान कौंवा ले गया है तो वो कौंवे के पीछे भागेंगे. ये चेक नहीं करेंगे कि कान चेक नहीं करेंग क्योंकि उनकी बुद्धि कहीं और से संचालित होती है. विनोद वर्मा में रेड के दौरान की बातचीत को सार्वजनिक करते हुए कहा कि गहने और बिल मिलने पर उन्होंने किसी को फोन किया और बताया की गहने के पूरे बिल है. लेकिन उधर से जो निर्देश आए उसके बाद कहने लगे जी सर मैं इन्हें सीज करूंगा. तो जांच अधिकारी आपके यहां आ रहा है वो खुद फैसले नहीं ले रहा है. तो सवाल ये है क्या रेड के पीछे आधार क्या है. पुलिस वाले का बयान या एक गृहमंत्री का सपना है. किसी तरह से कांग्रेस पार्टी में जो लोग भी चुनाव के लिए मुख्यमंत्री के लिए काम कर रहे है. उन सब लोगों को जेल में डाल दिया जाए. या एक प्रधानमंत्री की तानाशाही है. एक परफेक्ट तानाशाही की तरह काम करता है की अपने प्रतिद्वंदियों को कुचल दो. विपक्ष नाम का कोई संस्था बचे ही नहीं. मैं उनसे बार बार पूछता था आधार क्या है तो वे कहते थे कि हमें पता नहीं है. इन चुनाव चुनाव के परिणाम को जनता के वोट से बदलने के बजाय बीजेपी और उनके नेता अलग तरीके से बदलने की कोशिश कर रहे है. कांग्रेस पार्टी में काम करने वाले को प्रताडि़त किया जाए ताकि वो चुपचाप घर में बैठ जाए. सवाल ये है मनी लांड्रिंग का जांच करना चाहते है तो ये स्वागत योग्य कदम है. सट्टेबाजी पर छत्तीसगढ़ पुलिस भी जांच कर रही है. बहुत लोगों को गिरफ्तार किया गया है. लेकिन जब छत्तीसगढ़ पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार यूपी जाती है तो यूपी पुलिस छत्तीसगढ़ पुलिस पर कार्यवाही करती है. सट्टेबाजी के खिलाफ आपकी भावना क्या है ? लूडो जैसे खेल को केंद्र सरकार ने जुआ में बदल दिया है. क्रिकेट और शतरंज को जुआ बना दिया है. केंद्र सरकार के नियम है की लूडो पर सट्टा खेलोगे तो जीएसटी लगेगा. ये राज्य सरकार नहीं कर रही है. ये केंद्रीय गृह मंत्री और पीएम के सहमति से कानून बना है. जो साधारण लूडो को सट्टेबाजी में बदल रहे है यहां पर आकर बता रहे है हम सट्टेबाजी की जांच कर रहे है.इससे ज्यादा दोहरे चरित्र का कोई उदाहरण नहीं हो सकता है. यानी बीजेपी की राज्य नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व इन्हीं केंद्रीय एजेंसी के भरोसे चुनाव लडऩा चाहती है.मेरे पास 65 करोड़ का एक अठन्नी भी नहीं मेरे पास किसी भी रास्ते से नहीं आया है. मेरे घर में 6 लोग है सभी अर्निंग करते है. मैं उन चीजों से दूर रहा हूं जिसमे दलदल है.मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुझे सलाहकार बनाया मेरे दायित्व है की में उनकी छवि पर दाग न लगने दूं. मेरे किसी काम से उनकी छवि पर दंग न लगे. मैं एआईसीसी मेंबर हूं उस नाते से भी कह रहा हूं मेरे काम से पार्टी की छवि पर दाग लगने नहीं दूंगा. पिछली बार भी कोशिश हुई थी. सीडी कांड में ब्लैकमेलिंग का और सीबीआई ने मुजबर दबाव डाला नाम लेने के लिए. लेकिन मुझे पता था ये सीडी रमन सिंह ने बनवाई थी. मैने सबूत दिया था तब आखिर में जो चालान प्रस्तुत किया गया उसमे ब्लैकमेलिंग की धारा हटा दिया गया था जिसके तहत मुझे 65 दिन जेल में रखा गया था. गौरतलब है कि ईडी ने महादेव बुक ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले गिरफ्तार एएसआई चंद्रभूषण वर्मा और विनोद वर्मा का संबंध होने का दावा किया है. इसके अलावा आरोप लगाया है कि दुबई से हवाला के माध्यम से मोटी रकम हर महीने आते थे. जिसे चंद्रभूषण वर्मा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े नेताओं को ‘संरक्षण राशि’ के रूप में वितरित कर रहा था. ईडी ने कहा कि अब तक एएसआई चंद्रभूषण वर्मा को करीब 65 करोड़ रुपये नकद मिले थे.

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