बीजापुर में नक्सलियों ने 26 मई को अपने बन्द के आह्वान के एक दिन पहले यानी 24 मई की रात ही आवापाल्ली- उसूर मार्ग को कई जगह से काटकर मार्ग अवरुद्ध कर दिया था। साथ ही बैनर पोस्टर लगाकर मौजूदा मोदी सरकार, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव सरकार को आदिवासी विरोधी करार दिया। पुलिस ने शनिवार की सुबह आवापल्ली उसूर मार्ग को बहाल कराकर आवागमन जारी करा दिया है। दरअसल 10 मई को पिडिया में हुई मुठभेड़ में 12 नक्सलियों को मुठभेड़ में छत्तीसगढ़ की पुलिस ने मार गिराने का दावा किया था। जिसे लेकर नक्सलियों ने पर्चा जारी करके विरोध स्वरूप बन्द का आह्वान किया है। नक्सलियों ने बंद से एक दिन पहले शुक्रवार- शनिवार की दरमियानी रात बीजापुर उसूर सड़क को जगह जगह से खोद कर मार्ग बाधित कर दिया था। वही बैनर और पर्चे लगाये गये थे। आवापल्ली- उसूर मार्ग पर सीतापुर के पास नक्सलियों ने आधा दर्जन गड्ढे खोदे थे। नक्सलियों ने पर्चा जारी करके पहले ही बंद का आव्हान किया था। पिडिया मुठभेड़ में मारे गये 10 लोगों को ग्रामीण बताकर नक्सलियों ने बंद बुलाया है। साथ ही पर्चे में नक्सलियों ने विष्णुदेव सरकार को आदिवासी विरोधी बताया है। बता दें उसूर सड़क इसके पहले भी सैकड़ों बार नक्सली घटनाओं का गवाह रहा है। सीतापुर में सीआरपीएफ़ 196 बटालियन का कैम्प लगने के बाद पहली बड़ी घटना है जहां नक्सलियों ने सड़क को कई जगह से क्षतिग्रस्त किया है। इस इलाक़े में विकास योजनाओं में तेज़ी लाने सरकार ने सुरक्षाबलों के कैम्प तैनात किए हैं जिसमें सीतापुर, गलग़म और नंबी में कैम्प खोले गये हैं। बीजापुर से उसूर मार्ग सुरक्षाबल के जवानों ने बहाल कराकर आवागमन जारी करा दिया है। साथ ही जवान इलाके में सर्चिंग व पेट्रोलिंग कर रहे हैं। आज झीरम हत्याकांड की बरसी है। आज ही के दिन 2013 में नक्सलियों ने झीरम सड़क से लौट रहे कांग्रेस के काफिले को टारगेट किया था। सुकमा में परिवर्तन यात्रा के बाद कांग्रेस का फ्रंटलाइन लीडरशिप सुकमा से झीरम होते जगदलपुर लौट रहा था जहाँ महेंद्र कर्मा और नंद कुमार पटेल जैसे दिग्गज नेताओं को नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया था।

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