रायपुर। बेटियों को संरक्षण प्रदान करें और इतना हौसला दें कि कोई मुसीबत आए तो सामना कर सकें और अपने पैरों में खड़े हो सके। आज महिलाओं के प्रति जो अपराध या घटनाएं हो रही है, उन्हें रोकने या सामना करने के लिए यह जरूरी है कि हम बेटियों को, महिलाओं को सशक्त बनाएं। महिला सशक्तिकरण के सपने तभी सच होंगे जब हम बेटियों को शिक्षित करेंगेे और उन्हें बराबरी का दर्जा देंगे। समाज को जगाने के लिए महिलाओं का जागृत होना जरूरी है। एक बार जब महिलाएं अपना कदम उठा लेती है तो परिवार आगे बढ़ता है, गांव आगे बढ़ता है और राष्ट्र विकास की ओर उन्मुख होता है। यह बात राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके आज करपात्री धाम वाराणसी द्वारा नारी शक्ति और भारत विषय पर आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए कही। राज्यपाल ने दीप प्रज्ज्वलित कर वेबिनार का शुभारंभ किया। राज्यपाल ने कहा कि जब वे राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य थी तो उन्होंने एक सर्वे कर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी को प्रतिवेदन सौंपा, जिसमें मैंने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बजट में प्रावधान का प्रस्ताव दिया था। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा जेन्डर आधारित बजट तैयार करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई थी। राज्यपाल ने कहा कि यदि महिलाओं में हिम्मत और मजबूत इच्छा शक्ति हो तो वे कठिन से कठिन लक्ष्य प्राप्त कर सकती हैं। हमारे देश में कई क्षेत्र में महिलाएं काम कर रही है। जैसे प्रशासनिक क्षेत्र में किरण बेदी तथा अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला और वायु सेना में गुंजन सक्सेना जैसी महिलाओं ने अपना परचम लहराया है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी जनजातीय समाज के सामान्य परिवार से हैं। अपने जीवन के प्रारंभिक में कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ा परन्तु हिम्मत नहीं हारी और राज्य सभा सदस्य, राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की उपाध्यक्ष और राज्यपाल के पद तक पहुंची। यदि कोई महिला समस्या लेकर आती है तो उनकी मदद प्राथमिकता से करती हूं और उनका हौसला अफजाई करती हूं। राज्यपाल ने कहा कि देश में प्राचीन समय से स्त्रियों को पूज्यनीय माना जाता है। देवी के रूप में उनकी वंदना की जाती है। सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करने वाली नारी इस सृष्टि की सर्वोत्तम कृति है, जिसमें क्षमा, प्रेम, करूणा एवं ममता सहित अनेक गुण समाहित है। समाज की सर्वाधिक महत्वपूर्ण इकाई होने के बावजूद स्त्रियों को रूढिग़त एवं परम्परावादी समाज द्वारा कई जरूरी अधिकार प्रदान नहीं किये गये थे, जिससे उनके व्यक्तिगत विकास में बाधाएं खड़ी हुई और उनका विकास अवरूद्व हुआ। लेकिन शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ आज स्थिति बदली है। यदि हम स्कूल एवं कॉलेजों की प्रावीण्य सूची देखते हैं तो हमेशा उच्चतम स्थानों में बेटियों का नाम रहता है। यहां तक खेलों में भी उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही है। पंजाब मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस इकबाल अहमद अंसारी ने कहा कि महिलाओं के प्रति समाज के व्यवहार में व्यापक परिवर्तन की आवश्यकता है। नेहु केंद्रीय विश्वविद्यालय शिलोंग के कुलपति प्रो. एस. के श्रीवास्तव ने कहा की आत्मनिर्भर महिलाएं ही नए भारत का निर्माण कर सकती हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती ममता शर्मा ने कहा की महिलाओं को मौखिक नहीं आत्मीय सम्मान की आवश्यकता है। भारत को विकसित बनाने के लिए आधी आबादी के योगदान को सुनिश्चित कराना होगा। नेपाल सरकार की पूर्व चुनाव आयुक्त ईला शर्मा ने कहा की नारी का सम्मान कीजिए। समाज में पुरुष सत्ता नहीं सामान्य सत्ता होना चाहिए। कार्यक्रम को स्वामी अभिषेक ब्रम्हचारी ने भी संबोधित किया। वेबिनार में युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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