रायपुर। केंद्र की मोदी सरकार ने जो तीन किसान विधेयक पारित किया है, यह पूर्णत: किसान और कृषि विरोधी है। इससे लगभग 80 प्रतिशत किसान कंगाल और गुलाम हो जायेंगे। इस किसान विरोधी काला कानून का छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा ने घोर निंदा की है। क्योंकि इस किसान विरोधी नीति से फसलों की समर्थन मूल्य और कृषि मंडी बाजार को समाप्त करने का षडयंत्र है। सरकारी कृषि मंडी के बदले निजी मंडी को प्राथमिकता देने से एक तरफ किसानों का शोषण होगा। वहीं दूसरी ओर पी.डी.एस. के अभाव में आम उपभोक्ता जमाखोर कालाबाजारी शोषकों के चंगुल में फंस जाएंगे। बाजार पर सरकार की कोई अंकुश नहीं होगा। इससे आवश्यक वस्तुओं की कीमत में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी होगी। जिससे किसान, मजदूर और आम नागरिक महंगाई लूट के शिकार हो जायेंगे। किसान मोर्चा के प्रदेश नेता राज्य आंदोलनकारी अनिल दुबे जी.पी.चंद्राकर, दीनदयाल वर्मा, लालाराम वर्मा, चेतन देवांगन, अशोक ताम्रकर, महेंद्र कौशिक, ईश्वर साहू, गोवर्धन वर्मा, गिरधारी ठाकुर, अशोक कश्यप, चन्द्रप्रकाश साहू, सतमन साय ने केंद्र सरकार से मांग की है कि यदि मोदी सरकार किसान हितैषी है तो समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा दे और समर्थन मूल्य से कम में खरीदी करने वालों पर कठोर से कठोर कानूनी कार्यवाही करे।उसी प्रकार किसान मोर्चा ने राज्य के बघेल सरकार से भी मांग की है कि छत्तीसगढ़ राज्य में भी समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा दे, भाजपा सरकार द्वारा लागू किये गए किसानों का काला कानून सौदा पत्रक को अबिलम्ब ही खत्म करे। साथ ही साथ सरकारी मंडियों में बारहों माह समर्थन मूल्य में खरीदी बिक्री की गारंटी की नीति लागू करे। अन्यथा किसान मोर्चा आंदोलन करेगा।
केंद्र और राज्य सरकार समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा दे-किसान मोर्चा
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