सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के चर्चित रामअवतार जग्गी हत्याकांउ मामले में गुरूवार को अहम फैसला सुनाया हैं। कोर्ट ने अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ सीबीआइ की अपील स्वीकार करते हुए मामला पुन: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को भेज दिया है, ताकि वहां मेरिट के आधार पर विस्तृत सुनवाई की जा सके। यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संजय करोल और सदस्यीय पीठ ने सुनाया। कोर्ट के इस फैसले से अमित जोगी की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, सीबीआइ और पीडि़त पक्ष द्वारा दायर अपीलों को स्वीकृत कर दिया था, जिसके बाद तीनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआइ जांच वाले मामलों में अपील का अधिकार राज्य सरकार को नहीं, बल्कि केंद्र सरकार को होता है, इसलिए राज्य सरकार की अपील अस्वीकार्य मानी गई, जबकि सतीश जग्गी की अपील तकनीकी आधार पर खारिज हुई। अदालत ने सीबीआइ की अपील में हुई देरी को माफ करते हुए कहा कि इतने गंभीर मामले को केवल तकनीकी कारणों से खारिज नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट को निर्देंश दिया कि वह सभी पक्षों की दलीलें सुनकर मामले की मेरिट पर अंतिम निर्णय दे। इस फैसले से जग्गी हत्याकांड की कानूनी लड़ाई को नई दिशा मिल गई हैं।

चार जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रारंभिक जांच राज्य पुलिस ने की थी, बाद में मामला सीबीआइ को सौंपा गया। जांच में पूर्व मुख्यमंत्री स्व.अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी सहित 31 अभियुक्त बनाए गए थे। इनमें से दो बुल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोडक़र बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपितों को दोषी ठहराया गया था।














