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 अब तक मुंबई पर ‘ठाकरे’ यानी शिवसेना की सत्ता थी। शिवसेना ने मुंबई को २३ महापौर दिए। ये सभी महापौर कट्टर मराठी थे। अब यह परंपरा क्या आगे भी निभाई जाएगी? ऐसा सवाल उठे, इस प्रकार के नतीजे मुंबई में आए। मराठी माणुस, मराठी अस्मिता की हार एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस, आशीष शेलार, अमित साटम जैसे मराठी लोगों ने करवाई। जिसमें, चुनाव आयोग का उन्हें पूरा साथ मिला। ऐसे में यह चुनाव था या चुनाव आयोग द्वारा करवाया गया चुनाव, ऐसा सवाल उठता है। महाराष्ट्र में भाजपा की लहर है, ऐसा उनके लोग कहते हैं, लेकिन यह लहर नहीं, बल्कि सत्ता और भ्रष्ट पैसों का कहर है। इन भ्रष्ट पैसों के दम पर मुंबई पर कब्जा करने के लिए भाजपा और मिंधे गुट ने क्या-क्या नहीं किया? इस चुनाव में भी आयोग ने बहुत गड़बड़ियां कीं। मराठी क्षेत्रों में मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। उंगलियों से स्याही पोंछने का इंतजाम किया गया। गणेश नाईक जैसे मंत्री के नाम भी हटा दिए गए। ऐसी हजारों घटनाओं के बावजूद, मतदाताओं ने आखिरकार अपना कर्तव्य निभाया। यह लेख लिखते समय चुनाव के पूर्ण नतीजे नहीं आए थे। इसलिए आज नतीजों का विश्लेषण नहीं किया जा सकता। मुंबई समेत २६-२७ महानगरपालिका जीतेंगे, ऐसा देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव से पहले कहा था। यह आत्मविश्वास और अहंकार इफरात पैसे और सत्ता का है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल एक चर्चासत्र के लिए मुंबई आए और कहा, ‘‘हम मुंबई महानगरपालिका में २०० सीटें जीतकर दिखाएंगे।’’ यह आत्मविश्वास विकास कार्यों का कतई नहीं, बल्कि यंत्र, पैसों का मंत्र एवं दबाव तंत्र का ही है। इन चुनावों के बाद महाराष्ट्र में क्या उथल-पुथल होगी, इस पर गौर करना होगा। भाजपा और उसके मित्र दलों के पास बड़ा बहुमत है। फिर भी सरकार स्थिर नहीं है। मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री शिंदे के बीच सीधी दावेदारी है। अमित शाह शिंदे के एकमात्र पालनहार हैं। क्योंकि मुख्यमंत्री फडणवीस और अमित शाह के बीच संबंध अच्छे नहीं हैं, यह अब जगजाहिर है। इसलिए अनगिनत भ्रष्टाचार और घोटाले करने के बावजूद शिंदे को अभय मिला है। फिर भी शिंदे और अजीत पवार को बेनकाब करने का एक भी मौका श्री. फडणवीस नहीं छोड़ते। शिंदे में भ्रष्टाचार और पैसा इकट्ठा करने की ‘हवस’ कितनी ज्यादा है, ये फडणवीस ने ‘लोकसत्ता’ को दिए गए साक्षात्कार में बताया है। वे सभी मामले विस्फोटक हैं। मुख्यमंत्री रहते हुए शिंदे ने जो काम किए, वे राज्य के आर्थिक नियोजन को बिगाड़ रहे थे। शिंदे ने अपने ठेकेदारों को २० रुपए के काम १०० रुपए में दिए। उन ८० रुपयों में से ७० रुपए शिंदे की जेब में जाते रहे। परियोजनाओं की लागत बढ़ाकर कमीशन खाने का उद्योग श्री. फडणवीस ने रद्द कर दिया। ऐसी लगभग ४०,००० करोड़ रुपए की परियोजनाएं जो शिंदे ने मंजूर की थीं, उन्हें रद्द करने का पुण्य कार्य श्री. फडणवीस ने किया। इससे शिंदे दबाव में आ गए। महानगरपालिका के चुनाव में शिंदे और उनके लोगों को ‘कैश’ यानी नकदी की किल्लत महसूस हुई और फडणवीस यही चाहते थे। हालांकि, ये सच है तब भी मुंबई में अपने हर उम्मीदवार को ५ करोड़ एवं अन्य महानगरपालिकाओं में २ करोड़ देने का काम शिंदे की पार्टी ने किया। मुख्यमंत्री ने ४०,००० करोड़ रुपए के काम को रोक दिया, यह शिंदे के आर्थिक कारोबार की एक छोटी-सी घटना है। अब महाराष्ट्र की राजनीति में भी ड्रग्स की डीलिंग का पैसा पैâल गया है। इसी पैसे से ‘मतदाता’ खरीदे जाते हैं। यह सब भयावह है। नशे की गोलियां और नशे का पैसा सत्ताधारी घरों तक पहुंचा रहे हैं। ऐसे में अब बचा क्या?
अडानी पर बड़ा हमला
भाजपा के चहेते उद्योगपति गौतम अडानी ने महाराष्ट्र समेत पूरे भारत को कैसे निगल लिया है, इसका जबरदस्त प्रेजेंटेशन श्री. राज ठाकरे ने शिवाजी पार्क की सभा में दिखाया तब देश दहल गया। अभी तक राहुल गांधी दिल्ली में और उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में अडानी के राक्षसी वृत्ति पर प्रहार करते रहे। राज ठाकरे ने अडानी द्वारा काबिज भारत और महाराष्ट्र का नक्शा सामने रखा। अडानी पूरे भारत के नक्शे के मालिक बन गए। भारत का एक बड़ा भूभाग पहले चीन ने निगला और भारत के अंतर्गत गौतम अडानी ने मौके के भूभाग और सार्वजनिक संपत्तियां निगल लीं, यह स्पष्ट नजर आता है। चीन ने अरुणाचल प्रदेश से लेकर लद्दाख तक भारत की सीमाएं निगल लीं। उनकी घुसपैठ जारी ही है, लेकिन चीन के एक प्रतिनिधिमंडल के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दिल्ली के कार्यालय में रेड कार्पेट बिछाया। यह ढोंग है। अडानी का साम्राज्य पिछले दस सालों में सिर्फ नरेंद्र मोदी के कारण खड़ा हुआ है। अडानी ने जो उद्यम खड़े किए, वे प्रतिस्पर्धियों की कनपटी पर बंदूक की नली रखकर किए। उन्होंने मोदी के आशीर्वाद से सभी एयरपोर्ट, बंदरगाह, सार्वजनिक उद्योगों पर कब्जा कर लिया। यह सारा पैसा आया कहां से? अडानी ने लगभग १८ से २० फीसदी कर्ज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लिया है। मतलब यह जनता का पैसा है। देश की अर्थव्यवस्था में सुराख करके ये कर्ज लिए गए। अगर यह अडानी ग्रुप कभी डगमगाया, तो इसका असर उन बैंकों में जमा पैसे रखने वाले हर भारतीय नागरिक पर पड़ेगा। देश की अर्थव्यवस्था टूटकर धराशायी हो जाएगी और अडानी विदेश भाग जाएंगे। जनता के पैसे पर मोदी अपने मित्र अडानी का साम्राज्य बढ़ा रहे हैं। यह इतिहास का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है। मुंबई महानगरपालिका चुनाव में शिवसेना-मनसे गठबंधन के खिलाफ भ्रष्टाचार का यही पैसा खेला जा रहा है। धारावी समेत कई और जमीनें उनके कब्जे में रहें इसीलिए महाविकास आघाडी में फूट डालने का प्रयास अडानी के लोग करते रहे और उस जाल में कुछ लोग फंस गए। गौतम अडानी ने मराठी एकता को हराने के लिए मुंबई में अपनी पूरी ताकत लगा दी। भाजपा को सत्ता मिले और मुंबई अपने कब्जे में आ जाए, यह अडानी का सपना है। एकनाथ शिंदे जैसे मराठी माणुस ने मुंबई में अडानी के पैर मजबूत करने के लिए दिल्ली के दरवाजे पर अपना स्वाभिमान गिरवी रख दिया, यह इतिहास में लिखा जाएगा।
अजीत पवार के झटके
महानगरपालिका चुनाव में अजीत पवार ने भाजपा का पूरी तरह चीरहरण कर दिया। भाजपा के भ्रष्टाचार और लूट की फाइलें उनके पास हैं, यह बम गिराकर उन्होंने खलबली मचा दी। भाजपा ने उनकी सरकार (१९९९) के दौरान १०० करोड़ रुपए का सिंचाई घोटाला किया और इस १०० करोड़ रुपए को ‘पार्टी फंड’ के तौर पर इस्तेमाल किया। इस लेन-देन में १० करोड़ रुपए रिश्वत के तौर पर अधिकारियों को दिए गए। यह घोटाला पुरंदर जलसिंचन योजना में हुआ। योजना की कीमत ३३० करोड़ रुपए तक बढ़ा दी गई। यह बढ़ाई हुई कीमत थी। १०० करोड़ रुपए बढ़ाकर फाइल तैयार की गई। १९९९ में १०० करोड़ का मतलब आज के दो-एक हजार करोड़ रुपए। भाजपा ने सिंचाई घोटाला करके ये पैसे लिए और अजीत पवार ने भाजपा के सिंचाई घोटाले का पर्दाफाश किया। यह फाइल उनके पास होने का विस्फोट अजीत पवार ने अब किया है। गणेश नाईक के शब्दों में कहें तो यह हराम का पैसा है। अजीत पवार, भाजपा और शिंदे के पास बड़े पैमाने पर हराम का पैसा है। हराम के पैसों पर ये तीनों एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं। फिर भी तीनों एक ही सरकार में रह रहे हैं। राज्य के उप मुख्यमंत्री ने सीधे मुख्यमंत्री पर हमला किया और मुख्यमंत्री ने पलटवार किया। ‘‘भाजपा ने मुझ पर ७० हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले का आरोप लगाया, लेकिन आज मैं उनकी सरकार में हूं।’’ अजीत पवार ने यह कहकर प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री फडणवीस का मुखौटा फाड़ दिया है। शिंदे के ४० हजार करोड़ के भ्रष्टाचार को उन्होंने कैसे रोका, ये मुख्यमंत्री फडणवीस खुलेआम बताते हैं।
भ्रष्टाचार के दलदल में लिपटे हुए चुनाव आयोग के रूप में इस चुनाव को याद किया जाएगा। उस दलदल में उन्होंने मुंबई को भी डुबो दिया। हराम के पैसों की खनखनाहट ऐसे हुई कि सभी के वस्त्र बह गए।
मराठी माणुस और मुंबई के संरक्षण के लिए ‘ठाकरे बंधुओं’ ने लड़ाई लड़ी। अस्मिता की लड़ाई का यह इतिहास फिर से लिखा जाएगा।
महानगरपालिका चुनाव खत्म हुए, नतीजे आ गए। असली राजनीति तो बाद में ही होगी!

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