गुजरात में छात्र की हत्या से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने निजी स्कूल की प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने स्कूल का प्रबंधन अपने नियंत्रण में ले लिया है।

गुजरात हाईकोर्ट ने एक निजी स्कूल में हुए कक्षा 10 के छात्र की चाकू मारकर हत्या के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए स्कूल प्रबंधन की प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी गंभीर चूकों पर सवाल खड़े किए हैं। यह घटना 19 अगस्त 2024 को हुई थी, जिसके बाद पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया था और सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को तय की है। न्यायमूर्ति निर्जर देसाई ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब राज्य सरकार खुद स्कूल के प्रशासन पर सवाल उठा चुकी है, तो क्या कोई भी जिम्मेदार अभिभावक अपने बच्चे को ऐसे संस्थान में दाखिला देना चाहेगा।

डीईओ ने संभाला स्कूल का प्रबंधन
छात्र की हत्या के बाद बने हालात को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया था। हालांकि, स्कूल प्रबंधन ने इस प्रशासनिक कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर अदालत में सुनवाई चल रही है।

राज्य सरकार का कड़ा रुख
राज्य सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि स्कूल प्रबंधन को तत्काल राहत नहीं दी जा सकती। सरकारी वकील जीएच वीरक ने बताया कि दिसंबर के मध्य से स्कूल प्रशासन सहयोग नहीं कर रहा है और बार-बार मांगने के बावजूद जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए गए। सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूल नकद में फीस वसूल रहा था, जबकि पिछले एक महीने से मांगे गए वित्तीय रिकॉर्ड अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

छात्रों की सुरक्षा के लिए नए दाखिले बंद
सरकार ने अदालत को बताया कि छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूल में नए दाखिलों पर रोक लगाई गई है। इसे एहतियाती कदम बताया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना रोकी जा सके। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल सहयोग का दावा करना, वास्तविक अनुपालन नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी बच्चे की मौत का मुआवजा कभी उसके माता-पिता के टूटे सपनों की भरपाई नहीं कर सकता। अदालत ने स्कूल के रवैये को शिक्षा को मुनाफे का धंधा बनाने जैसा बताते हुए कहा कि जब सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही थी, तब नैतिक जिम्मेदारी के तहत प्रबंधन को खुद पीछे हट जाना चाहिए था।

पीड़ित परिवार और अभिभावकों की भूमिका
मृतक छात्र के माता-पिता सहित अभिभावकों के एक संगठन ने भी इस मामले में याचिका दायर कर खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। वे स्कूल प्रबंधन की दलीलों का विरोध कर रहे हैं।

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