मिर्गी का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है. अक्सर लोगों को लगता है कि मिर्गी की बीमारी हो जाए, तो यह जिंदगीभर ठीक नहीं होता है. मिर्गी यानी एपिलेप्सी की बीमारी को लेकर आज भी लोगों में कई तरह की गलतफहमी हैं. कई लोग इसे मानसिक रोग समझ लेते हैं, जबकि असल में मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल यानी नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारी है. इसमें दिमाग की नसों की गतिविधि असामान्य हो जाती है, जिसके कारण बार-बार दौरे पड़ते हैं. हालांकि मिर्गी का सही समय पर इलाज किया जाए, तो इसे काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं.

नोएडा के मेट्रो हॉस्पिटल के सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया कि मिर्गी एक ब्रेन डिजीज है. जब ब्रेन की सेल्स में अचानक असामान्य इलेक्ट्रिकल सिग्नल बनने लगते हैं, तब यह बीमारी पैदा हो जाती है. इसके कारण व्यक्ति को झटके आ सकते हैं, बेहोशी हो सकती है, शरीर अकड़ सकता है या कुछ देर के लिए व्यक्ति आसपास की चीजों से अनजान हो जाता है. हर मिर्गी का दौरा एक जैसा नहीं होता है. कुछ दौरे बहुत हल्के होते हैं तो कुछ ज्यादा गंभीर भी हो सकते हैं. मिर्गी की वजह से लोगों को बार-बार दौरे पड़ने लगते हैं और ऐसे में सही ट्रीटमेंट कराना बहुत जरूरी होता है.

डॉक्टर की मानें तो मिर्गी होने के कई कारण हो सकते हैं. सिर में गंभीर चोट लगना, जन्म के समय दिमाग को नुकसान, दिमाग में इंफेक्शन, ट्यूमर, स्ट्रोक, तेज बुखार या जेनेटिक कारण इसकी वजह बन सकते हैं. कई मामलों में मिर्गी का कोई स्पष्ट कारण पता नहीं चल पाता है. हालांकि सभी मामलों में इसका इलाज कारगर होता है. मिर्गी की पहचान के लिए मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, दौरे के लक्षण और कुछ जांच करते हैं. इसमें इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (EEG), MRI और CT स्कैन शामिल हो सकते हैं. सही जांच से यह पता चलता है कि दौरे किस प्रकार के हैं और उनका कारण क्या हो सकता है.

अक्सर लोगों का सवाल होता है कि क्या मिर्गी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है? इस सवाल पर डॉक्टर ने कहा कि मिर्गी का इलाज आमतौर पर दवाओं के जरिए किया जाता है. प्रॉपर दवा लेने से मिर्गी के ज्यादातर मरीजों के दौरे पूरी तरह बंद हो जाते हैं या काफी हद तक कंट्रोल हो जाते हैं. कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी या वेगस नर्व स्टिमुलेशन की सलाह भी दी जाती है. इलाज डॉक्टर की निगरानी में लंबे समय तक कराना जरूरी होता है. कई मरीजों की दवाएं कुछ साल बाद बंद कर दी जाती हैं, जबकि कुछ लोगों को इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए जिंदगीभर दवाएं लेनी पड़ती हैं.

Disclaimer: इस खबर में दी गई स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं.

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