एम्बुलैंसों का इस्तेमाल रोगियों को अस्पताल लाने-ले जाने तथा शवों को उनकी मंजिल (श्मशानघाट) तक पहुंचाने के लिए होता है परंतु विशेषकर कमजोर वर्ग के मरीजोंं की समय पर एम्बुलैंस तथा इलाज न मिल पाने से मौत हो जाती है, जबकि मृतकों की लाश ले जाने के लिए उनके परिजनों को एम्बुलैंस न मिलने से भारी परेशानी के अलावा कई बार लाशों का अपमान भी होता है जिसकी पिछले एक वर्ष की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
* 11 फरवरी, 2025 को ‘पश्चिम चंपारण’ (बिहार) के ‘चनपटिया सामुदायिक स्वास्थ्य कें द्र’ में इलाज के लिए लाए गए ‘अदया राम’ नामक बुजुर्ग की मौत के बाद उसके परिवार के सदस्यों को एम्बुलैंस नहीं मिलने के कारण उन्हें मोटरसाइकिल पर शव ले जाने को मजबूर होना पड़ा। 

* 29 मार्च, 2025 को ‘शहडोल’ (मध्य प्रदेश) में  ‘सुंदर यादव’ अपनी बीमार मां को इलाज के लिए ‘शहडोल मैडीकल कालेज’ में लेकर आया लेकिन समय रहते इलाज न मिलने के कारण उसकी मां की मौत हो गई तथा लाश को गांव ले जाने के लिए एम्बुलैंस भी नहीं मिली। 
इस पर ‘सुंदर यादव’ और उसके भाई ने एक कामचलाऊ रेहड़ी पर अपनी मां की लाश बांधी और उसे मोटरसाइकिल से खींच कर 80 किलोमीटर दूर अपने गांव की श्मशानभूमि में पहुंचाया।
* 12 अगस्त, 2025 को ‘नागपुर’ (महाराष्ट्र) में मोटरसाइकिल पर अपने पति ‘अमित यादव’ के साथ जा रही उसकी पत्नी ‘ग्यारसी यादव’ नीचे गिर कर ट्रक के पिछले टायर से कुचली गई। लाश ले जाने के लिए  बहुतेरी कोशिशों के बावजूद एम्बुलैंस न मिलने के कारण मजबूर होकर उसे अपनी पत्नी की लाश मोटरसाइकिल पर ही ले जानी पड़ी। 
* 24 जनवरी, 2026 को ‘सागर’ (मध्य प्रदेश) में सब्जी का ठेला लगा कर गुजर-बसर करने वाले बुजुर्ग ‘पवन साहू’ अपनी बीमार पत्नी ‘पार्वती’ को अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलैंस न मिलने के कारण उसे हाथ ठेले पर लाद कर चल पड़ेे लेकिन समय रहते उसे अस्पताल न पहुंचा सके और रास्ते में ही उनकी पत्नी की मौत हो गई।

* 30 जनवरी, 2026 को ‘फरीदबाद’ के ‘अस्पताल’ में एक महिला रोगी की मौत के बाद एम्बुलैंस न मिलने के कारण मृतक महिला के पति को अपनी पत्नी का शव ठेले पर लेकर जाना पड़ा। महिला का बेटा पीछे ठेले पर मां के शव पर बैठा था और वह मां के शव को पकड़े रहा ताकि रास्ते में लगने वाले झटकों से लाश नीचे न गिर जाए। उक्त घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए ‘हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग’ ने यह स्पष्ट करते हुए कि संविधान के अनुच्छेद 21 में गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार भी शामिल है, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक तथा फरीदाबाद के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। 

आयोग ने अस्पताल प्रबंधन के इस कथन पर भी सवाल उठाए हैं कि सरकारी एम्बुलैंस शव परिवहन के लिए निर्धारित नहीं है।आयोग ने आॢथक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सभी अस्पतालों में मुफ्त और सम्मानजनक शव परिवहन की नीति बनाने की सिफारिश की है।
* और अब 7 फरवरी, 2026 को ‘दतिया’ (मध्य प्रदेश) की ‘इंद्रगढ़’ में एक बेसहारा महिला की मौत हो गई तो सम्बन्धित अधिकारियों को इसकी सूचना देने के बावजूद एम्बुलैंस नहीं पहुंची तो नगर परिषद ने कचरा ढोने वाले वाहन में महिला का शव लाद कर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया और अंतिम संस्कार के लिए भी उसे कचरे वाली गाड़ी में ही ले जाया गया। उक्त घटनाएं दर्शाती हैं कि गरीबों और कमजोर वर्ग के लोगों के लिए सरकारी इलाज की सुविधाएं केवल कागजों, दावों और भाषणों तक ही सीमित हैं। जिन अस्पतालों को गरीबों के लिए जीवन रक्षक कहा जाता है, वहीं उन्हें उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है। अत: इस खामी पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम जल्द उठाए जाने चाहिएं।

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031