नीतीश कुमार ने कभी कहा था- ‘कर्पूरी जी ने कभी अपने परिवार को आगे नहीं बढ़ाया. कुछ लोग सिर्फ परिवार को प्रमोट करते हैं. क्रपूरी जी की प्रेरणा से मैंने भी परिवार को नहीं बढ़ाया.’ निशांत कुमार के राजनीति में आ जाने के बाद नीतीश कुमार के इस कथन का क्या होगा!

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीति में वंशवाद के विरोधी रहे हैं. उनकी जुबान से अक्सर लालू यादव की आलोचना के स्वर इसी मुद्दे पर फूटते रहे हैं. खुद भी नीतीश ने इसे अपने ऊपर लागू किया. 3 दिन पहले तक यही  माना जा रहा था कि अपने लंबे संसदीय जीवन में उन्होंने इस मुद्दे पर जो ख्याति अर्जित की है, उसे बचाए रखेंगे. कर्पूरी ठाकुर को इस मामले में नीतीश के आदर्श रहे हैं, जिन्होंने जीते जी अपने परिवार के किसी सदस्य को राजनीति में आने नहीं  दिया. नीतीश के बेटे निशांत कुमार को जब से राजनीति में लाने की मांग साल भर से उठती रही. पर, नीतीश ने चुप्पी साध रखी थी. निशांत भी इस बाबत कुछ नहीं बोलते थे. तब लोग यह मान रहे थे कि राजनीति में वंशवाद के विरोधी रहे नीतीश इसके लिए तैयार नहीं होंगे. लेकिन, खुद राज्यसभा जाने और निशांत को बिहार की राजनीति में एंट्री मारने की उन्होंने इजाजत दे दी. निशांत ने शनिवार को जेडीयू की सदस्यता भी ग्रहण कर ली. इससे विरोधियों को उनकी आलोचना का अवसर मिल गया है कि बेटे के व्यामोह में नीतीश ने जीवन भर की कमाई झटके में गंवा दी.

समाजवादी विचारधारा के नीतीश!
नीतीश कुमार समाजवादी विचारधारा से जुड़े रहे हैं. वे राजनीति में परिवारवाद की अक्सर आलोचना करते रहे हैं. उनकी नजर में परिवारवाद लोकतंत्र के लिए हानिकारक रहा है. इसके लिए वे कांग्रेस, राजद और अन्य दलों पर आरोप लगाते आए हैं. अपने को कर्पूरी ठाकुर का सच्चा अनुयायी साबित करने के लिए वे कई बार अंदर ऐलान कह चुके हैं कि कर्पूरी जी के सिद्धांतों के तहत उन्होंने अपने परिवार को राजनीति से दूर रखा.

नीतीश भूल गए अपना ही उसूल!
हालांकि अब अपने पुत्र निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री की उनकी रजामंदी ने उनके रुख पर सवाल खड़े कर दिए हैं. परिवारवाद को लेकर वे अपने विरोधी राजद सुप्रीमो पर तो हमला बोलते ही रहे हैं, लेकिन कांग्रेस और अन्य दल भी उनकी आलोचना से नहीं बच पाए. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2017 में अमेरिका में कहा था कि भारत में परिवारवाद एक सामान्य बात है. उन्होंने सपा नेता अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और एमके स्टालिन जैसे नेताओं के नाम भी उदाहरण के रूप में गिनाए थे. राहुल के इस बयान का नीतीश ने पुरजोर विरोध किया था. उन्होंने कहा- परिवारवाद को भारत की राजनीति में स्वीकार्य कहना गलत है. राजनीतिक परिवार में जन्मे व्यक्ति को शासन करने का योग्य मानना गलत है. अगर तुलना की जाए, तो गैर-परिवारवादी नेता परिवारवादियों से कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने ही भारत में परिवारवाद की शुरुआत की, जो अब अन्य दलों में फैल गया है. नीतीश का यह बयान तब आया था, जब उन्होंने महागठबंधन छोड़ कर भाजपा के साथ सरकार बना ली थी.

लालू के परिवारवाद पर हमलावर
लालू यादव का परिवार हमेशा नीतीश के निशाने पर रहा है. लालू के परिवारवाद के मसले पर नीतीश ने 5 जून 2018 को एक टिप्पणी यह की थी कि आज के युवा अपनी क्षमता से राजनीति में नहीं आते, बल्कि परिवार की वजह से आगे बढ़ते हैं. उनका यह बयान राजनीति में तेजस्वी यादव के उभार के संदर्भ में था. लालू के खिलाफ इसी साल उन्होंने विधानसभा में एक ऐसी टिप्पणी की थी, जिससे तेजस्वी तिलमिला गए थे. उन्होंने लालू के बारे में कहा कि वे जब जेल गए तो अपनी पत्नी को सीएम बना दिया. 2020 के विधानससभा चुनाव के दौरान नीतीश ने लालू के परिवारवाद पर सीधा हमला किया था. उन्होंने कहा- जिन्हें कोई ज्ञान या अनुभव नहीं, वे सलाहकारों के कहने पर मेरे खिलाफ बोलते हैं. हम परिवारवाद की चिंता में नहीं, बल्कि पूरे बिहार को अपना परिवार मानते हैं. कुछ लोगों के लिए सिर्फ खून के रिश्ते ही परिवार हैं. यह तेजस्वी यादव पर निशाना था. नीतीश ने खुद को परिवारवाद से दूर बताया, जो उनकी छवि का अहम हिस्सा रहा है. बाद में एक मौके पर उन्होंने यह भी कहा था कि परिवारवादी पार्टियां भविष्य में नहीं बचेंगी. 26 नवंबर 2021 को संविधान दिवस पर पीएम मोदी के परिवारवाद पर हमले के बाद नीतीश ने कहा- परिवारवादी पार्टियों का भविष्य में बचे रहना संभव नहीं.

लालू को परिवारवाद का प्रमोटर कहा
नीतीश ने राजद को परिवार केंद्रित पार्टी बताते रहे हैं. वे इस मामले में अपनी पार्टी जेडीयू को इससे मुक्त बताते रहे हैं. 24 जनवरी 2024 को कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर पटना हुई रैली में नीतीश ने कहा था- कर्पूरी जी ने कभी अपने परिवार को आगे नहीं बढ़ाया. कुछ लोग सिर्फ परिवार को प्रमोट करते हैं. क्रपूरी जी की प्रेरणा से मैंने भी परिवार को नहीं बढ़ाया. यह लालू यादव के परिवार पर उनका सीधा हमला था. लालू के परिवार में दोनों बेटे- तेजस्वी और तेज प्रताप के अलावा पत्नी राबड़ी देवी और बेटी मीसा भारती राजनीति में हैं. लालू की एक और बेटी रोहिणी आचार्य मे भी भाग्य आजमाया, लेकिन असफल रहीं. हालांकि राजनीति में उनकी रुचि अब भी बनी हुई है. वे अक्सर सोशल मीडिया प्लेटफार्म  X पर राजनीतिक पोस्ट डालती रहती हैं.

नेता राजाओं की तरह नहीं जन्मते!
पिछले साल भर से निशांत के राजनीति में आने की अकलें लगती रहीं. इसकी शुरुआत भी रोचक ढंग से हुई थी. आमतौर पर राजनीति से दूर रहने वाले नीतीश के बेटे निशांत ने पहली बार अपने गांव के एक कार्यक्रम में राजनीतिक बात की थी. उन्होंने लोगों से अपील की थी कि उनके पिता को कामों की बदौलत फिर से विजयी बनाएं. तब से ही अटकलें लगनी शुरू हुईं. हालांकि राजनीति में आने के सवाल को निशांत हंस कर टाल देते थे. सस्पेंस तब और गहराया, जब इस सवाल पर नीतीश ने कभी  कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. निशांत भी समय-समय पर सधे अंदाज में ही राजनीतिक बात करते. हालांकि जेडीयू कार्यकारी अध्यक्ष सांसद संजय झा ने यह कह कर संकेत दे दिया कि सभी निशांत को रोजनीति में देखना चाहते हैं. बाद में केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने तो निशांते के लिए नीतीश से आशीर्वा देने का आग्रह कर  दिया. अब नीतीश की हरी झंडी मिलने पर निशांत ने औपचारिक रूप से जेडीयू ज्वाइन भी कर ली है. नीतीश ने अब तक जिस आदर्श को कायम रखा, उससे वे पलट गए. वे अब किस मुंह स यह कहेंगे कि नेता राजाओं की तरह नहीं जन्मते.-ओमप्रकाश अश्क

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