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Bengal Election: कोलकाता/ नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कालियाचक घटना पर कड़ी कार्रवाई की है. सुप्रीम कोर्ट ने मालदा के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने कहा कि और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है. बुधवार रात मालदा के कालियाचक थाने के न्यायिक अधिकारियों के साथ हुई बदसलूकी के बाद गुरुवार सुबह यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आया. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष यह मामला उठाया गया. कालियाचक घटना में प्रशासन के रवैये से सुप्रीम कोर्ट बेहद नाराज है. सुप्रीम कोर्ट ने गृह सचिव और पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांगी है. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कानून को चुनौती किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जायेगी.

अदालत को दी गयी पूरी जानकारी

गुरुवार की सुनवाई में राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने पैरवी की. आयोग की ओर से डीएस नायडू और गोपाल शंकर नारायण ने पैरवी की. आयोग के वकील ने बुधवार शाम को कालियाच में घटी पूरी घटना का विस्तृत विवरण दिया. अटॉर्नी जनरल तुषार मेहता ने भी पैरवी की. मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा- हमें उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से एक पत्र प्राप्त हुआ है. कल रात, हममें से कुछ लोगों को व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से सूचित किया गया कि मालदा जिले के कालियाचक क्षेत्र में तीन महिलाओं सहित कुल सात न्यायाधीशों को बदमाशों ने घेर लिया है. यह घेराबंदी दोपहर 3:30 बजे शुरू हुई.

काफी देर से मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक

मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा- अपने पत्र में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न तो जिला मजिस्ट्रेट और न ही पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे. स्थिति को संभालने के लिए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को स्वयं राज्य के पुलिस महानिदेशक और गृह सचिव को बुलाना पड़ा. स्थिति का वर्णन करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा- अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश संपर्क में थे. उन्हें आधी रात के बाद रिहा किया गया. रिहाई के बाद जब वे घर जा रहे थे, तब भी उन्हें लाठियों से पीटा गया और उनकी कार में उन पर पत्थर फेंके गए. भारत के मुख्य न्यायाधीश ने जिला न्यायाधीशों को निर्धारित समय के भीतर काम करने का निर्देश दिया है.

बेहद नाराज थे न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची

न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची बेहद नाराज थे और उन्होंने कहा- इस घटना में प्रशासन को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत थी. सर्वोच्च न्यायालय को आयोग पर पूरा भरोसा है कि वह पूरी स्थिति से निपट लेगा. न्यायमूर्ति बागची ने कहा- आयोग को आवश्यक बल तैनात करने होंगे. न्यायालय ने आयोग को सलाह दी कि राज्य प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने चाहिए कि इन न्यायिक अधिकारियों का काम सुचारू रूप से हो सके. मुख्य न्यायाधीश ने कहा- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि इस घटना का न्यायिक अधिकारियों पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा. मुख्य न्यायाधीश का पत्र देखकर हमें बेहद निराशा हुई है.

सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश

  1. ECI को निर्देश दिया जाता है कि वह पर्याप्त केंद्रीय बलों की मांग करे और उन्हें उन सभी जगहों पर तैनात करे जहाँ न्यायिक अधिकारी SIR मामलों की सुनवाई कर रहे हैं.
  2. उन होटलों, गेस्ट हाउसों और अन्य जगहों पर भी पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जानी चाहिए, जहाँ ये अधिकारी इस समय ठहरे हुए हैं.
  3. यदि किसी न्यायिक अधिकारी या उनके परिवार के सदस्यों को कोई आशंका या खतरे का अंदेशा है, तो उसका तुरंत आकलन किया जाए और उचित कार्रवाई की जाए.
  4. सुरक्षा और सुचारू कामकाज सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक अन्य सभी उपाय ECI द्वारा राज्य सरकार के समन्वय से किए जाएंगे.
  5. मुख्य सचिव, गृह सचिव और DGP को संयुक्त रूप से निर्देश दिया जाता है कि वे यह सुनिश्चित करें कि आपत्तियां दर्ज कराने के लिए एक समय में परिसर में 3-5 से अधिक व्यक्तियों को प्रवेश की अनुमति न दी जाए.
  6. किसी भी ऐसी जगह पर, जहाँ SIR मामलों की सुनवाई चल रही हो, किसी भी समय पांच से अधिक व्यक्तियों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी.
  7. मुख्य सचिव और DGP न्यायालय के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे.
  8. कलेक्टर, मुख्य सचिव, DGP, जिला मजिस्ट्रेट और SSP को निर्देश दिया जाता है कि वे कारण बताएँ कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से प्राप्त पत्र के आलोक में उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई क्यों न की जाए.
  9. उन्हें आगे यह भी निर्देश दिया जाता है कि वे सुनवाई की अगली तारीख, 6 अप्रैल को (वर्चुअली) उपस्थित रहें.

जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका से कोर्ट नाराज

मुख्य न्यायाधीश ने कहा- इससे पहले हमने आदेश में कहा था कि न्यायाधीशों को एसआईआर प्रक्रिया में आपत्तियों के समाधान की जिम्मेदारी दी गई है. उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए. उन्होंने आगे कहा- यह घटना राज्य सरकार की अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफलता का एक उदाहरण है. संबंधित अधिकारियों को सूचित किया जाना चाहिए कि मामले की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने न्यायाधीशों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था क्यों नहीं की. सर्वोच्च न्यायालय पुलिस अधीक्षक और जिला मजिस्ट्रेट की भूमिका से नाराज है. उन्हें तलब किया गया है.

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