तिरुवनंतपुरम : केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने पदभार संभालते ही एक महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय लिया है। सीएम ने विवादास्पद सिल्वर लाइन सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना को समाप्त करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने पूरे केरल में इस परियोजना के लिए जारी सभी भूमि अधिग्रहण अधिसूचनाओं को रद्द करने की घोषणा की है। यह परियोजना पिनराई विजयन सरकार की सबसे बड़ी महत्वकांक्षी योजना थी।

तिरुवनंतपुरम में अपने सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने घोषणा की कि तिरुवनंतपुरम-कासरगोड सिल्वर लाइन सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जुड़ी सभी भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया गया है।

प्रदर्शनकारियों पर दर्ज केस होंगे वापस

वीडी सतीशन का यह फैसला यह पिछली वाम सरकार की प्रमुख परियोजनाओं में से एक पर एक बड़ा और नाटकीय उलटफेर माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने इस परियोजना का शुरुआत से ही विरोध किया था। अब अधिग्रहण के लिए चिन्हित भूमि की अधिसूचना रद्द कर दी गई है। साथ ही, सिल्वर लाइन परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उनके खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामले वापस लिए जाएंगे और इसके लिए सरकार अदालत में आवश्यक प्रक्रिया शुरू करेगी।

सर्वेक्षण के बाद प्रॉपर्टीज पर लगी पीली पर्ची हटाई जाएगी

सीएम ने यह भी बताया कि पिछली सरकार के सर्वेक्षण के दौरान निजी संपत्तियों में लगाए गए विवादित पीले सर्वे पत्थरों को भी हटाया जाएगा। वीडी सतीशन ने कहा कि यह परियोजना पर्यावरण के लिए एक संभावित आपदा थी और उनकी सरकार ऐसे विकास कार्यों के पक्ष में है जो लोगों और पारिस्थितिकी को नुकसान न पहुंचाएं। कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया कि केरल लोक सेवा आयोग (केपीएससी) को सिफारिश की जाएगी कि 31 अगस्त को समाप्त होने वाली सभी रैंक लिस्टों को 30 नवंबर तक बढ़ाया जाए, जिससे हजारों नौकरी अभ्यर्थियों को लाभ मिलेगा।

केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट फंड बोर्ड के कामों की जांच

मुख्यमंत्री ने बताया कि यूडीएफ के चुनावी घोषणा पत्र को सभी विभागों में भेजकर सरकार की दीर्घकालिक “विजन 2031” योजना के तहत क्रियान्वयन रोडमैप तैयार किया जाएगा। साथ ही, 100-दिवसीय कार्य योजना भी जल्द जारी की जाएगी, जिसमें तत्काल लागू किए जा सकने वाले वादों पर ध्यान होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि केरल में चल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्यों की समीक्षा की जाएगी और केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी।

हमने सिल्वरलाइन का विरोध इसलिए किया था क्योंकि इसके पास उचित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तक नहीं थी। यदि इसे लागू किया जाता तो यह पर्यावरणीय आपदा साबित होती क्योंकि 300 किलोमीटर तक 30 फुट ऊंचे तटबंध और अन्य 200 किलोमीटर तक 10 फुट ऊंची दीवारें बनाने की योजना थी।। मॉनसून के दौरान यह पर्यावरणीय आपदा में बदल जाता। यह टिकाऊ परियोजना नहीं थी।

वीडी सतीशन

क्या थी केरल की सिल्वरलाइन परियोजना

वाम मोर्चा सरकार की 530 किलोमीटर लंबी सिल्वरलाइन परियोजना को ‘के-रेल’ द्वारा तैयार किया गया था, जो केरल सरकार और रेल मंत्रालय का एक संयुक्त उपक्रम है। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य के दो छोरों पर स्थित जिलों के बीच यात्रा समय को घटाकर केवल चार घंटे करना था। इस परियोजना के खिलाफ पूरे राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे जिनका नेतृत्व कांग्रेस ने किया था।

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