कानपुर देहात की अदालत ने चर्चित बिकरू कांड से जुड़े एक अहम मामले में चार युवकों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह मामला उस समय सामने आया था जब कुख्यात अपराधी विकास दुबे के इस्तेमाल किए गए असलहों को छिपाने और उन्हें मध्य प्रदेश में बेचने की साजिश रची गई थी। अदालत के इस फैसले को कानून व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारी मात्रा में असलहा और कारतूस हुए थे बरामद

पुलिस जांच के दौरान आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में अवैध हथियार और कारतूस बरामद किए गए थे। अभिनव के पास से एक इंग्लिश राइफल (मेड इन यूएसए स्प्रिंग फील्ड सेमी ऑटोमैटिक) और दस कारतूस मिले थे। वहीं रामजी उर्फ राधे के पास से एक देसी 12 बोर बंदूक, 25 कारतूस, एके-47 के दो कारतूस और 7.62 एमएम के 20 कारतूस बरामद किए गए।इसके अलावा शुभम पाल के पास से एक रिवॉल्वर, 40 कारतूस, 32 बोर पिस्टल के चार कारतूस, एक अद्धी तमंचा और एक 38 बोर रिवॉल्वर के साथ उसका एक कारतूस मिला। पुलिस के अनुसार, यह सभी असलहे बिकरू कांड के बाद छिपाकर रखे गए थे और बाद में इन्हें बेचने की योजना बनाई जा रही थी।

अदालत ने सुनाई कड़ी सजा

अदालत ने सभी आरोपियों को उनके अपराध के अनुसार सजा सुनाई। रामजी को सात वर्ष की कैद और 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। संजय को भी सात वर्ष की सजा के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना देना होगा। वहीं अभिनव और शुभम को ढाई-ढाई साल की सजा और पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया।अदालत ने अपने फैसले में साफ कहा कि अवैध असलहों का संग्रह और उन्हें छिपाना गंभीर अपराध है, जो समाज और सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है।

शासन और सुरक्षा व्यवस्था को दी चुनौती

मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोपियों की आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए सजा में राहत की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना था कि आरोपियों के परिवार में कमाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं है।हालांकि, सरकारी पक्ष ने इस तर्क का विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों के पास किसी भी प्रकार का वैध लाइसेंस नहीं था। उन्होंने जानबूझकर ऐसे असलहे छिपाए जो बड़े अपराध में इस्तेमाल हुए थे। यह केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि शासन और सुरक्षा व्यवस्था को सीधी चुनौती देने जैसा है। इसलिए सख्त सजा जरूरी है।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद तेज हुई सुनवाई

इस मामले में हाईकोर्ट ने पहले ही शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद सुनवाई में देरी को लेकर अभियोजन पक्ष पर सवाल उठे थे। संजय सिंह परिहार के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में आरोप लगाया था कि बार-बार प्रार्थना पत्र देकर मामले को लंबित रखा जा रहा है।इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने करीब एक माह पहले पुलिस कमिश्नर और जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) को तलब किया था। वहीं संजय की जमानत याचिका तीन बार खारिज हो चुकी थी और चौथी बार भी न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर ने सख्त रुख अपनाया था।

क्या था बिकरू कांड

गौरतलब है कि दो जुलाई 2020 को कानपुर देहात के बिकरू गांव में विकास दुबे गैंग ने पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में बिल्हौर के क्षेत्राधिकारी सहित आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी गई थी, जबकि सात अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। घटना के बाद मुख्य आरोपी विकास दुबे समेत तीन अपराधियों को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया था।

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930