आंध्र प्रदेश पुलिस की अल मलिक इस्लामिक यूथ की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अल मलिक इस्लामिक यूथ का ISIS और AQIS से संबंध निकला है। जांच में एक आतंकी साज़िश का खुलासा हुआ है जिसमें पाकिस्तान स्थित हैंडलर शामिल हैं। आंध्र प्रदेश पुलिस की जांच में पता चला कि खवातीन नाम से एक महिला विंग बनाई गई थी। इस महिला विंग की लीडर हैदराबाद की सईदा बेगम को बनाया गया था।
सईदा बेगम महिला विंग की लीडर
पुलिस ने बताया कि महिला विंग की लीड कर रही सईदा बेगम ने खौफनाक प्लान बनाया था। इस समूह का मकसद नए सदस्यों को हथियार, स्नाइपर राइफल और विस्फोटक चलाने की ट्रेनिंग देना था, ताकि वे पूरे भारत में हमले कर सकें। अब तक, इस ऑपरेशन के तहत छह राज्यों से 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इन राज्यों में छापेमारी
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब आंध्र प्रदेश पुलिस ने इस मामले के सिलसिले में करीब एक दर्जन संदिग्धों को गिरफ्तार किया। पकड़े गए लोगों में आंध्र प्रदेश के तीन लोग भी शामिल हैं। बिहार में आतंकी खेल का खुलासा होने के बाद आंध्र प्रदेश से बिहार, दिल्ली, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और राजस्थान जैसे कई राज्यों में टीमें भेजी गईं।
इस्लामिक कट्टरपंथी बनाने का काम
खुफिया विभाग के एक सूत्र के अनुसार इस समूह के संबंध विदेशों में सक्रिय गुर्गों से थे और यह ऑनलाइन माध्यम से जिहादी दुष्प्रचार को सक्रिय रूप से फैला रहा था। खुफिया विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि एक जिहादी मॉड्यूल का पता चला है, जिसके तार विदेशी हैंडलर्स और इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) तथा अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) जैसे चरमपंथी संगठनों से जुड़े हैं। यह मॉड्यूल भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के काम में लगा हुआ था।
रहमतुल्लाह शरीफ नेटवर्क का बॉस
मुख्य आरोपी और उसके साथियों पर युवाओं को निशाना बनाने के लिए ऑनलाइन दुष्प्रचार का इस्तेमाल करने का आरोप है। जांचकर्ताओं ने मुख्य आरोपी रहमतुल्लाह शरीफ को इस नेटवर्क का एक प्रमुख चेहरा बताया है। पुलिस के अनुसार, शरीफ और उसके साथी कथित तौर पर उन गुर्गों के संपर्क में थे जो जिहादी सामग्री प्रसारित करने और ऑनलाइन वीडियो के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करने का काम करते थे।
ख्वातीन विंग में महिलाओं को जोड़ रही थी सईदा
आरोपियों पर चरमपंथी सामग्री साझा करने और सोशल मीडिया के ज़रिए विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में रहने का आरोप है। इस समूह पर ओसामा बिन लादेन, इसरार अहमद शेख, ज़ाकिर नाइक और अनवर अल-अव्लाकी के वीडियो प्रसारित करने का आरोप है। इनका मकसद मुस्लिम युवाओं को जिहाद और चरमपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित करना था। पुलिस को यह भी संदेह है कि यह नेटवर्क एक अलग ‘ख्वातीन’ (महिला) विंग के माध्यम से महिलाओं को अपने साथ जोड़कर अपना विस्तार करने की कोशिश कर रहा था।
पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया और बांग्लादेश से जुड़े तार
जांचकर्ताओं के अनुसार, इस समूह ने 40 से अधिक सोशल मीडिया खातों के ज़रिए पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया और बांग्लादेश में बैठे हैंडलर्स से संपर्क स्थापित किया था। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क ‘हिजरत’ (पलायन) को सुगम बनाने और अंततः भारत में एक इस्लामिक राज्य, या ‘खिलाफत’ स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा था। अल-हकीम शकूर, मोहम्मद हुज़ैफ़ा, निंजा, हेमरॉक्सी, अबू मुहरिब और अबू बलुशी नामक हैंडलर्स पर आरोप है कि उन्होंने इस समूह को उग्रवादी प्रशिक्षण और स्नाइपर राइफल सहित विभिन्न हथियारों के इस्तेमाल के संबंध में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कथित तौर पर इस समूह को हथियारों की आपूर्ति का आश्वासन भी दिया था। जांचकर्ताओं को आगे यह भी शक है कि इस मॉड्यूल से जुड़े कुछ कट्टरपंथी लोग पहले से ही विदेशों के मदरसों में जिहादी ट्रेनिंग ले रहे थे, जबकि इस नेटवर्क में और लोगों को भर्ती करने की कथित तौर पर कोशिशें की जा रही थीं।
राष्ट्रगान में गालियां और तिरंगे का अपमान
इस ग्रुप ने कथित तौर पर अपने सदस्यों की ऐसी तस्वीरें पोस्ट कीं, जिनमें वे मास्क पहने हुए थे, ISIS के झंडे लहरा रहे थे और वन उम्माह (One Ummah) जैसे नारे लगा रहे थे, ऐसा करके वे भारत में एक इस्लामिक राष्ट्र बनाने के अपने इरादे को ज़ाहिर कर रहे थे। जांचकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने भड़काऊ वीडियो शेयर किए, भारत के राष्ट्रगान को अपमानजनक तरीके से गाया और उसमें गालियों का इस्तेमाल किया, और ऐसी सामग्री फैलाई जिसमें राष्ट्रीय ध्वज का अपमान और उसे जलाते हुए दिखाया गया था।
पाकिस्तान और कश्मीर के कुछ आतंकियों के संपर्क में थी सईदा बेगम
आरोपियों में से एक, सईदा बेगम, कथित तौर पर पाकिस्तान के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में भी सक्रिय लोगों के संपर्क में थी और जिहादी गतिविधियों को कोऑर्डिनेट करने की योजना बना रही थी। जांच में साइबर आतंकवाद, IED बनाने का सामान और भारत-विरोधी सामग्री भी शामिल है। यह ग्रुप सिर्फ़ वैचारिक प्रोपेगैंडा तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वे साइबर आतंकवाद और बम बनाने से जुड़ी सामग्री भी शेयर कर रहे थे। आरोपियों ने कथित तौर पर साइबर हमलों को बढ़ावा देने वाली सामग्री फैलाई, जिसमें सरकारी वेबसाइटों को हैक करने की योजनाएं भी शामिल थीं। एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े संभावित विदेशी फंडिंग के स्रोतों की भी जांच कर रही हैं। पुलिस ने आगे दावा किया कि ग्रुप के सदस्यों ने ‘ब्लैक पाउडर’ और ‘इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस’ (IEDs) बनाने से जुड़ी सामग्री अपलोड की थी, और साथ ही यह भी दावा किया था कि हथियार पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान से मंगाए जाएंगे।



















