Saur Nav Varsh 2026: आज 14 अप्रैल, मंगलवार से हिंदू सौर नववर्ष की शुरुआत हो रही है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य देव राशि चक्र की पहली राशि ‘मेष’ में प्रवेश करते हैं, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है. इसी दिन से सौर कैलेंडर का नया साल शुरू होता है. भारत के अलग-अलग राज्यों में इस दिन अलग-अलग नामों से यह पर्व मनाया जाता है. पंजाब में इसे बैसाखी, बंगाल में पोइला बैशाख, केरल में विशु, बिहार-यूपी में सतुआ संक्रांति और असम में बोहाग बिहू के रूप में मनाया जाता है.
सौर नववर्ष पर क्या करें?
इस दिन सूर्य अपनी उच्च राशि में प्रवेश करते हैं, इसलिए यह समय आध्यात्मिक और मानसिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना जाता है. इस दिन सूर्य देव की कृपा पाने के लिए निम्न कार्य करने चाहिए:
सूर्य देव को दें अर्घ्य
सौर वर्ष के पहले दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद तांबे के लोटे में जल, लाल फूल, अक्षत और थोड़ा गुड़ मिलाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें. अर्घ्य देते समय सूर्य देव के मंत्रों का जाप करें. मान्यता है कि इससे आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
दान करें
मेष संक्रांति पर दान करना बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन जरूरतमंदों को गुड़, सत्तू, गेहूं, लाल वस्त्र या तांबे के बर्तन दान करना लाभदायक होता है. मान्यता है कि इससे कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में खुशहाली बनी रहती है.
स्नान
इस दिन नदियों या तालाबों में स्नान करना शुभ माना जाता है. यदि नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है.
घर की शुद्धता
इस दिन घर की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं. शाम के समय घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं, ताकि नकारात्मक ऊर्जा दूर हो और लक्ष्मी का वास हो.
(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।



















