12 अगस्त 2026 को आसमान में एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत खगोलीय घटना देखने को मिलेगी, जब पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेगा और कुछ समय के लिए दिन में अंधेरा छा जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसा नजारा कई दशकों बाद देखने को मिलेगा, जिसे लेकर दुनियाभर में उत्साह बना हुआ है। यह ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन जैसे क्षेत्रों में सबसे स्पष्ट दिखाई देगा। हालांकि भारत में इसका प्रभाव नजर नहीं आएगा, फिर भी यह खगोलीय घटना लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

यह पूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा। इसकी शुरुआत पूर्वी ग्रीनलैंड से होगी, जहां स्थानीय समयानुसार दोपहर करीब 4:30 बजे पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा। इसके बाद आइसलैंड में शाम करीब 5:45 बजे से 5:48 बजे तक यह अद्भुत दृश्य नजर आएगा। स्पेन में ग्रहण सूर्यास्त से ठीक पहले दिखाई देगा, जिससे आसमान का नजारा और भी आकर्षक बन जाएगा।

भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण रात 9:04 बजे शुरू होकर 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे तक रहेगा। हालांकि भारत में उस समय रात होने के कारण यह पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा और सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान क्या होता है?

सूर्य ग्रहण की प्रक्रिया धीरे-धीरे शुरू होती है। सबसे पहले चंद्रमा सूर्य के एक छोटे हिस्से को ढकता है, जिसे आंशिक ग्रहण कहा जाता है। जैसे-जैसे चंद्रमा आगे बढ़ता है, सूरज की रोशनी कम होने लगती है, तापमान में गिरावट महसूस होती है और वातावरण में अचानक शाम जैसा अहसास होने लगता है।

पूर्ण ग्रहण के कुछ मिनट बेहद खास होते हैं। आसमान अंधकारमय दिखाई देता है और कई बार तारे भी नजर आने लगते हैं। यही वजह है कि दुनियाभर के खगोल प्रेमी इस क्षण को देखने के लिए वर्षों तक इंतजार करते हैं।

क्यों खास है 2026 का यह सूर्य ग्रहण?

यह ग्रहण यूरोप के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 1999 के बाद पहली बार यूरोप में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। आइसलैंड में ऐसा नजारा 1954 के बाद और स्पेन में 1905 के बाद देखने को मिलेगा। वैज्ञानिकों और फोटोग्राफरों के लिए भी यह एक दुर्लभ अवसर होगा।

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