नई दिल्ली:

CII Summit 2026: एआई अब हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया है. आपके मन में कोई सवाल है,उसका आसान और डिटेल जवाब आपको एआई देगा, आपके लिए वो तस्वीरें बना रहा है. फोटो को टेक्स्ट में बदल रहा है. टेक्स्ट को वीडियो में बदल रहा है, आने वाला युग भी एआई का ही है. इसी कड़ी में आज अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने CII Annual Business Summit 2026में AI भविष्य में कैसे-कैसे अवसर देगा,उसपर अपनी बात रखी. उन्होंने उन बातों को सिरे से नकार दिया कि एआई किसी की नौकरी खा जाएगा. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत को एआई को ऐसे नहीं बनाना चाहिए जो अवसर कम करे,बल्कि ऐसा बनाना चाहिए जो उत्पादकता बढ़ाए, नई नौकरियां पैदा करे और छोटे व्यापारियों को ताकत दे.  

तेजी से बढ़ेगा AI का उपयोग-गौतम अदाणी 

गौतम अदाणी ने अपने संबोधन में कहा कि एक दशक पहले, बहुत कम लोगों ने भारत में मोबाइल डेटा के इतने बड़े विस्तार की कल्पना की थी, लेकिन जैसे ही स्मार्टफोन सस्ते हुए, नेटवर्क फैला, डेटा की कीमतें घटीं और इस्तेमाल तेजी से बढ़ गया. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी इसी तरह की तेज वृद्धि लाएगा, लेकिन यह बढ़ोतरी ऊर्जा की कहीं ज्यादा मांग करने वाली होगी. आज जहां डेटा सेंटर की क्षमता 2030 तक 5 गीगावॉट तक पहुंचने की उम्मीद है, वहीं 2047 तक यह करीब 75 गीगावॉट तक बढ़ सकती है. इसीलिए भारत को अभी से इसकी तैयारी करनी होगी.

नौकरियां नहीं खाएगा AI…’

गौतम अदाणी ने अपनी स्पीच में आगे कहा कि दुनिया भर में एआई (AI) को लेकर एक धारणा फैलाई जा रही है. कहा जा रहा है कि एआई इंसानों की नौकरियां खत्म कर देगा. कहा जा रहा है कि तकनीक इंसानी सोच और निर्णय को पूरी तरह बदल देगी और यह भी कहा जा रहा है कि बेहतर दक्षता (efficiency) का मतलब कम लोगों की जरूरत है.मैं इस सोच को पूरी तरह खारिज करता हूं.भारत को पश्चिमी दुनिया के डर को अपनाने की जरूरत नहीं है. कोई देश सिर्फ अपनी क्षमता की कमी से ही नहीं, बल्कि दूसरों के विचारों को सच मान लेने से भी अपने भविष्य को सीमित कर सकता है.

अदाणी ग्रुप के चेयरमैन ने आगे कहा कि भारत को एआई को ऐसे नहीं बनाना चाहिए जो अवसर कम करे,बल्कि ऐसा बनाना चाहिए जो
➔उत्पादकता बढ़ाए
➔नई नौकरियां पैदा करे
➔छोटे व्यापारियों को ताकत दे
➔भारत के लोगों को दुनिया के साथ मुकाबला करने का एक औजार दे

गौतम अदाणी ने अपने संबोधन में कहा कि एआई के तीन मुख्य स्तर होते हैं. 

पहला – पावर लेयर (ऊर्जा स्तर)
➔एआई की शुरुआत ऊर्जा से होती है.अगर भरोसेमंद, सस्ती और बड़े पैमाने पर उपलब्ध बिजली नहीं होगी, तो न प्रोसेसिंग हो सकेगी, न डेटा स्टोर होगा और न नेटवर्क चल पाएंगे.

दूसरा – कंप्यूट लेयर (गणना स्तर)
➔इसमें शामिल होते हैं—डेटा सेंटर, चिप्स, जीपीयू, सर्वर, कूलिंग सिस्टम और नेटवर्क.ये सभी मिलकर इंटेलिजेंस के युग की फैक्ट्रियां हैं, जहां एआई तैयार होता है.

तीसरा – एप्लिकेशन लेयर (उपयोग स्तर)
➔यहीं पर एआई का असली असर दिखाई देता है. किसानों, डॉक्टरों, शिक्षकों, उद्योगों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों, छोटे व्यवसायों, बैंकों और आम नागरिकों तक. कुल मिलाकर, ऊर्जा (Power) से कंप्यूट बनता है और कंप्यूट से एआई का उपयोग संभव होता है.

गौतम अदाणी ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि कंप्यूट से बुद्धिमत्ता (इंटेलिजेंस) पैदा होती है और बुद्धिमत्ता से नए कारोबार और अवसर जन्म लेते हैं.यही एआई का नया ढांचा है.यहां हमें बिल्कुल स्पष्ट होना होगा,एआई सिर्फ सॉफ्टवेयर नहीं है.

एआई है
➔इन्फ्रास्ट्रक्चर
➔ऊर्जा
➔कूलिंग सिस्टम
➔चिप्स
➔नेटवर्क
➔डेटा
➔प्रतिभा (टैलेंट)
➔शासन (गवर्नेंस)

गौतम अदाणी ने कहा कि लंबे समय तक डिजिटल दुनिया को ऐसी जगह माना जाता रहा, जहां कोई नक्शा नहीं होता, लेकिन आज के इस बदलते और बिखरे हुए समय में हमें समझना होगा कि डेटा और कंप्यूट का भी एक ठिकाना होना चाहिए और इंटेलिजेंस की भी अपनी भौगोलिक सीमा होनी चाहिए. अगर हमारा डेटा कहीं दूर देशों में प्रोसेस हो रहा है, तो इसका मतलब है कि हमारा भविष्य भी उन्हीं विदेशी जमीनों पर लिखा जा रहा है. यहीं पर पुरानी दुनिया और नई दुनिया का टकराव सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.

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