कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सुब्रत गुप्ता के सीएम के राजनीतिक सलाहकार और मनोज अग्रवाल के चीफ सेक्रेटरी बनाए जाने पर राजनीतिक बवाल मचा है। टीएमसी के बाद कांग्रेस ने भी इन नियुक्तियों पर आपत्ति जताई है। पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े अधिकारियों को नई सरकार में अहम पद दिए जाने पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यह अजीब बात है कि जो लोग SIR प्रक्रिया के प्रभारी थे, वे अब राज्य सरकार का हिस्सा हैं। इन आपत्तियों पर सीएम सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि मनोज अग्रवाल सिर्फ़ पूर्व सीईओ ही नहीं हैं, बल्कि राज्य के सबसे वरिष्ठ सिविल सेवक भी हैं। बीजेपी सरकार कानून के मुताबिक ही काम कर रही है।
जुलाई में है अग्रवाल का रिटायरमेंट
बंगाल में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। इसके बाद उन्होंने रविवार से काम करना शुरू कर दिया था। शुभेंदु अधिकारी के सीएम बनने के बाद राज्य के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. सुब्रत गुप्ता को सीएम का एडवाइजर यानी सलाहकार नियुक्त किया गया था। इसके बाद मनोज अग्रवाल की नियुक्त बतौर चीफ सेक्रेटरी की गई थी। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने तीखा हमला बोला था। अग्रवाल पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग के सीईओ थे। उन्होंने एसआईआर के साथ बंगाल चुनावों में पूरी व्यवस्था संभाली थी। मनोज अग्रवाल का रिटायरमेंट जुलाई में हैं। बंगाल में टीएमसी के सवाल उठाने पर सीएम शुभेंदु अधिकारी ने चुप्पी तोड़ते हुए जवाब दिया है।
यूपी के रहने वाले हैं अग्रवाल
मनोज अग्रवाल यूपी के रहने वाले हैं, जबकि डॉ. सुब्रत गुप्ता पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। उन्होंने 35 साल के करियर में 27 पदों पर विभिन्न जिम्मेदारियों को निभाया है। ऐसे में जब बंगाल में बीजेपी की पहली सरकार बनी है तब सुब्रत गुप्ता को शुभेंदु अधिकारी सरकार के सबसे पॉवरफुल अफसर के तौर पर देखा जा रहा है। मनाेज कुमार अग्रवाल 1990 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह भी 1990 बैच के आईएएस हैं। वे रिटायर हो चुके हैं। उन्होंने 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी जिम्मेदारी निभाई थी।



















