नई दिल्ली: तमिलनाडु में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की ओर से हाल ही में सनातन धर्म के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। उदयनिधि स्टालिन ने 12 मई को विधानसभा में सनातन धर्म के ‘समूल नाश’ करने वाली टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को उनके खिलाफ नई शिकायत पर सुनवाई होने वाली है शनिवार (16 मई,2026) को ही सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाने के लिए इस संबंध में एक नई याचिका दायर की गई है। लाइवलॉ ने यह रिपोर्ट दी है।
विधानसभा में सीएम के सामने की टिप्पणी
- दरअसल, उदयनिधि स्टालिन ने जब सितंबर 2023 में सनातन धर्म को डेंगू,मलेरिया की तरह मिटाने की बात कही थी, तभी सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
- अब 12 मई को विधानसभा में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की मौजूदगी में उन्होंने फिर से सनातन धर्म के खिलाफ जो भड़काऊ बयान दिया, उसको लेकर नई याचिका डाली गई है।
- नई तमिलनाडु विधानसभा के पहले सत्र के पहले ही दिन डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने कथित रूप से कहा था, ‘सनातन धर्म, जो कि लोगों को बांटता है, उसका समूल नाश होना चाहिए।’
हेट स्पीच के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बयान
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस तरह की टिप्पणियों (हेट स्पीच) को नामंजूर किए जाने के बाद भी तमिलनाडु के पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने पहले की तरह का ही बयान दिया है, जो कि न्यायिक प्रक्रिया का अपमान है। 19 मई को इस मामले की सुनवाई होगी।
हेट स्पीच पर दायर की गई है अवमानना याचिका
- बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में एक अवमानना याचिका भी डाली जा चुकी है।
- इसमें शाहीन अब्दु्लला बनाम भारत सरकार के मामले में रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जो दिया था कि हेट स्पीच के मामले में स्वत: ही एफआईआर दर्ज की जाए, उसी का हवाला दिया गया है।
- अवमानना याचिका एडवोकेट अमिता सचदेवा ने दायर की है, जिसमें पुलिस पर स्टालिन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद कार्रवाई करने में नाकाम रहने का दावा किया गया है।
- उनकी ताजा टिप्पणी के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है।
- पिछले 29 अप्रैल को ही सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई ने इसे सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था।
- तमिलनाडु में अब थलपति विजय की पार्टी की सरकार है और इस वजह से किसी भी आपराधिक मामले में कार्रवाई करने की जिम्मेदारी भी उसी की बनती है।



















