पांच देशों की यात्रा से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को मंत्रिपरिषद के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज, हाल में लिए गए नीतिगत फैसलों, उनके परिणामों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा, संभावनाएं जताई जा रही हैं कि कैबिनेट विस्तार पर भी चर्चा हो सकती है। हालांकि, बैठक के एजेंडे को लेकर बीजेपी ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
बैठक को क्यों माना जा रहा अहम
दरअसल, यह बैठक इस साल की पहली पूर्ण मंत्रिपरिषद बैठक है, जिसे काफी अहम माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक में मंत्रालयों और विभागों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। साथ ही हाल ही में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों के प्रभाव का आकलन किया जाएगा और आगे की प्राथमिकताओं पर भी मंथन होगा। सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि इनका लाभ अधिकतम लोगों तक पहुंच सके।
बैठक में सुधार एजेंडा पर भी विशेष ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही अगले 10 वर्षों के लिए व्यापक सुधारों का खाका पेश कर चुके हैं और इसे रिफॉर्म एक्सप्रेस बताते हुए कहा था कि इससे देश में प्रणालीगत बदलाव आए हैं और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिला है।
पश्चिम एशिया में जारी संकट पर हो सकती है चर्चा
प्रधानमंत्री बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संकट और उसके आर्थिक प्रभावों पर भी चर्चा कर सकते हैं। वह मंत्रालयों को निर्देश दे सकते हैं कि नागरिकों को होने वाली असुविधा को कम करने और प्रभावित क्षेत्रों पर असर घटाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज
सरकार में बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। 10 जून को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल की पहली वर्षगांठ से पहले मंत्रिमंडल में फेरबदल या विस्तार की संभावना को लेकर चर्चा बढ़ गई है। इसी कारण यह बैठक भी राजनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंत्रिपरिषद में बदलाव और विस्तार को लेकर बातचीत तेज हो गई है और जून के दूसरे हफ्ते में इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं। साथ ही यह भी कहा गया था कि किसी भी बदलाव से पहले सरकार मंत्रालयों के कामकाज और प्रदर्शन की समीक्षा कर रही है।



















