कोलकाता : 4 मई को जब बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत मिली, राज्य का नजारा बदल गया। केसरिया झंडों और गुलाल के साथ लोग सड़क पर उतरे। टीएमसी समर्थकों के जज्बात बदले। पूरे राज्य में कुछ ही घंटों में कई टीएमसी समर्थकों ने केसरिया चोला पहन लिया। आलोचक भी तारीफ के पुल बांधने लगे। नई सरकार के शपथ लेते के बाद टीएमसी राज में बनाए गए यूनियन ऑफिसों पर बीजेपी का झंडा और शुभेंदु अधिकारी की तस्वीरें लग गईं। बीजेपी में शामिल होने की होड़ भी लग गई।
हालात ऐसे बने कि बंगाल बीजेपी की पहली औपचारिक बैठक में स्पष्ट करना पड़ा कि वह फिलहाल किसी भी नए सदस्य को पार्टी में शामिल नहीं करेगी। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने दूसरे दलों के सदस्यों को पार्टी में शामिल करने वाले पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बीजेपी कोई धर्मशाला या ऐसी जगह नहीं है, जहां कोई भी घुस जाए। हम उन लोगों को पार्टी में शामिल नहीं करेंगे, जिन्होंने बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या की है। बीजेपी के दरवाज़े उन लोगों के लिए कभी नहीं खुलेंगे, जो सालों-साल भ्रष्टाचार, वसूली और आतंक की राजनीति में शामिल रहे हैं। यह उन कार्यकर्ताओं की पार्टी है, जो इसके आदर्शों, नीतियों और देश के हितों के अनुसार काम करते हैं। यह अवसरवादियों या स्वार्थी लोगों के लिए कोई पनाहगाह नहीं है।
सामिक भट्टाचार्य, बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष
2011 में हरे रंग में बदला था लालकिला
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पार्टी बदलने का ट्रेंड पुराना रहा है। 2011 में जब तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की थी, तब लाल किला कहे जाने वाले पश्चिम बंगाल में हरे रंग का बोलबाला हो गया। वाम मोर्चे के दौर में बनाए गए ऑटो-रिक्शा, टैक्सी यूनियन समेत कई ट्रेड संगठनों के दफ्तर पर टीएमसी का कब्जा हो गया। इन संगठनों के कार्यकर्ताओं ने पार्टी बदल ली और वाम मोर्चे के प्रतीकों को खत्म कर दिया। बीजेपी के सत्ता में आने के बाद कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के अधिकतर इलाकों में ट्रेड यूनियनों के ऑफिसों का रंग बदलने लगा। टीएमसी के पार्षद और जिले के कार्यकर्ताओं में अभी भी भाजपा में शामिल होने की होड़ लगी है। जब इसकी भनक बीजेपी के प्रदेश नेताओं को लगी तो उन्होंने पार्टी में शामिल होने की पॉलिसी के साथ कार्यकर्ताओं के नियम लागू किए।
बीजेपी का तृणमूलीकरण बर्दाश्त नहीं
बीजेपी के तृणमूल करण के खिलाफ प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी। नई गाइड लाइन के मुताबिक, बीजेपी के कार्यकर्ता विपक्षी दलों के कार्यालयों और ट्रेड यूनियनों पर कब्जा करने पर भी सख्त रोक लगा दी गई है। सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों, रंगदारी वसूली और सिंडिकेट चलाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। पार्टी पदाधिकारियों के आचरण पर नजर रखने के लिए एक अनुशासन समिति का गठन किया गया है। उन्होंने पार्टी के बैनरों के लिए प्रोटोकॉल में बदलाव भी किए हैं। अब पोस्टर और बैनर पर सीएम शुभेंदु अधिकारी की तस्वीर प्रदेश अध्यक्ष से पहले लगानी होगी।
सुनील बंसल ने नेताओं को दिया नया टास्क
चुनाव में जीत की भूमिका लिखने वाले सुनील बंसल भी एक्टिव हुए। उन्होंने प्रदेश के नेताओं को 25 मई तक बंगाल में 15-सदस्यीय जिला कोर समितियों का गठन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिला अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे एकतरफा निर्णय न लें, बल्कि कोर कमेटी के साथ मिलकर फैसले लें। सुनील बंसल ने चेतावनी दी कि पिछली गलतियों को तो माफ कर दिया गया है, लेकिन अब से संगठनात्मक चूकों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बंसल ने राज्य इकाई के सदस्यों से नगरपालिका और पंचायत चुनावों से पहले प्रत्येक जिले में 100 सशक्त कार्यकर्ताओं की पहचान करने की अपील की है।



















