इंसानों में तो सिंगल रहने की शिकायत आम है, लेकिन प्रकृति के कुछ जीव ऐसे भी हैं जो इंतजार की मिसाल पेश करते हैं. सांपों की बात करें तो कई प्रजातियां 8 से 10 साल या उससे भी ज्यादा समय तक अपने सही साथी का इंतजार करती है. अगर सही पार्टनर नहीं मिला तो वे जबरदस्ती या किसी और प्रजाति के साथ मिलन नहीं करते. यह उनकी वफादारी का अनोखा उदाहरण है.

सांपों का प्रजनन व्यवहार बेहद जटिल और रोचक है. ज्यादातर सांप प्रजातियां मौसम के अनुसार मेटिंग करती हैं. मादा सांप फेरोमोन छोड़कर नर को आकर्षित करती है. लेकिन नर को मादा को आकर्षित करने के लिए कई बार लंबा संघर्ष करना पड़ता है. कुछ प्रजातियों में नर सांप मादा के लिए लड़ते भी हैं. फिर भी अगर मादा को नर पसंद नहीं आया तो वह मना कर देती है.

सिंगल रहने में एक्सपर्ट
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार कुछ सांप जैसे रैटल स्नेक, पाइथन और कुछ कोबरा प्रजातियां लंबे समय तक सिंगल रह सकती हैं. खासकर दुर्गम जंगलों और द्वीपों पर रहने वाले सांपों में यह व्यवहार ज्यादा देखा जाता है. जहां जनसंख्या कम है, वहां सही साथी मिलने में कई साल लग जाते हैं. एक अध्ययन में पाया गया कि कुछ नर सांप 10 साल तक मादा की तलाश में भटकते रहते हैं. इस दौरान वे खाना कम खाते हैं और सिर्फ प्रजनन पर फोकस करते हैं. अगर सही मादा नहीं मिली तो वे मरने तक इंतजार करते हैं. दूसरी प्रजाति के साथ मिलन करने की बजाय वे अकेले जीवन बिताना पसंद करते हैं. यह selectivity प्रजाति की शुद्धता बनाए रखने के लिए जरूरी है. अगर सांप दूसरी प्रजाति से मिलन करें तो संतान कमजोर या अनुपयोगी हो सकती है.

नहीं करते दूसरी प्रजाति से मिलन
प्रकृति ने उन्हें यह सहज बुद्धि दी है कि सही साथी का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है. भारत में पाए जाने वाले कई सांप जैसे रॉयल स्नेक, कोबरा और वाइपर भी इसी व्यवहार को दिखाते हैं. मानसून के मौसम में इनका मेटिंग पीरियड होता है. इस समय सांप ज्यादा सक्रिय दिखते हैं. लेकिन फिर भी हर नर-मादा का जोड़ा नहीं बन पाता. सांपों के इस व्यवहार से हमें कई सबक मिलते हैं. पहला — सही साथी के लिए इंतजार करना गलत नहीं है. दूसरा — जबरदस्ती कोई रिश्ता बनाने से बेहतर है अकेले रहना. तीसरा — प्रकृति हर जीव को अपनी प्रजाति के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा देती है. हालांकि सांपों का जीवन जंगलों में खतरे से भरा होता है. कई बार इंतजार करते-करते वे शिकारियों का शिकार हो जाते हैं या सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं. इस वजह से कई प्रजातियां लुप्तप्राय हो रही हैं. वन्यजीव एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, सांपों में मेटिंग सीजन बेहद खास होता है. वे रासायनिक संकेतों (फेरोमोन) के आधार पर साथी चुनते हैं. अगर मैच नहीं हुआ तो वे आगे बढ़ जाते हैं. यह इंसानों से अलग है जहां सोशल प्रेशर के कारण गलत चुनाव हो जाते हैं.

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