भीषण गर्मी के बीच राजस्थान के भीलवाड़ा में एक अनोखा तप किया जाता है. यहां पंचमुखी श्मशान स्थित प्राचीन मसानिया भेरुनाथ मंदिर में नौतपा की शुरुआत के साथ 9 दिवसीय पंच धुना अग्नि तप का विशेष अनुष्ठान चल रहा है. मंदिर के पुजारी रवि कुमार सोलंकी इस अग्नि तप के मुख्य साधक हैं.
इस अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य देश में सुख-शांति, किसानों को अच्छी फसल, जगत कल्याण और मानसून में भरपूर बारिश की कामना करना है. धार्मिक मान्यता के अनुसार नौतपा के दौरान सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर अपनी किरणें सीधे धरती पर डालता है, जिससे गर्मी और तपिश चरम पर पहुंच जाती है. इस तपन को कम करने और जीव-जंतुओं तथा मानव जीवन को राहत दिलाने के लिए पांच दिशाओं में धूने जलाकर उनके बीच बैठकर साधना की जा रही है.
मंदिर परिसर में पांच कंडों से तैयार किए गए धूनों के बीच पुजारी रवि कुमार सोलंकी लगातार ध्यान और तपस्या में लीन हैं. श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर इस दुर्लभ अग्नि तप के दर्शन कर रहे हैं और आशीर्वाद ले रहे हैं।
“सूर्य की तपन कम करने के लिए अग्नि तप आवश्यक” – पुजारी
मंदिर पुजारी रवि कुमार सोलंकी ने बताया, “नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें अत्यधिक तेज हो जाती हैं. इस तपन को कम करने के लिए संत-महात्मा अग्नि तप करते हैं ताकि धरती पर रहने वाले सभी जीवों को राहत मिल सके. हम पांच धुनों के बीच बैठकर देश की सुख-शांति, अच्छी बारिश और किसानों की समृद्धि की कामना कर रहे हैं.”
श्रद्धालु गौरव ने कहा, “हमने पहले सिर्फ कहानियों में सुना था कि साधु अग्नि के बीच तपस्या करते हैं, लेकिन आज इसे अपनी आंखों से देख रहे हैं. यह अद्भुत और प्रेरणादायक नजारा है.”मंदिर में लगातार श्रद्धालुओं की भीड़ लगी हुई है. इस 9 दिवसीय अग्नि तप के समापन पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन भी किया जाएगा. स्थानीय लोगों को इस तपस्या से अच्छी बारिश और गर्मी से राहत की उम्मीद है.



















