नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली से एक हैरान करने और चौकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक दम्पति ने आरोप लगाते हुए दावा किया है कि आईवीएफ के जरिए जन्में जुड़वां बच्चे उनके जैविक बच्चे नहीं हैं. गुरुग्राम निवासी राहुल और मीनू राठौर का कहना है कि मेडिकल जांच में बच्चों का डीएनए माता और पिता दोनों से मैच नहीं किया है, जिसके बाद मामला कोर्ट पहुंच गया है. अब कोर्ट के आदेश के पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

राहुल राठौर का कहना है कि उनकी पत्नी का आईवीएफ इलाज साल 2024 से ही निजी अस्पताल में डॉक्टर ऋतु गर्ग की देखरेख में चल रहा था. उनकी सलाह पर ही वो आगे की प्रक्रिया के लिए दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित एससीआई आईवीएफ हॉस्पिटल में डॉ. मनप्रीत कौर के पास गए थे. यहां उनको डॉ. शिवानी सचदेव के पास IVF इलाज के लिए रेफर किया गया.

‘9 जनवरी 2025 को किए गए थे सभी मेडिकल टेस्ट’

दम्पति के अनुसार 9 जनवरी 2025 को अस्पताल में IVF प्रक्रिया से जुड़े मेडिकल टेस्ट किए गए. अस्पताल और डॉक्टरों ने दंपती को भरोसा दिलाया कि पूरी प्रक्रिया में केवल उन्हीं के जैविक नमूनों (अंडाणु और शुक्राणु) का इस्तेमाल किया जाएगा. राहुल राठौर ने आरोप लगाया कि 13 फरवरी 2025 को उनकी पत्नी के अंडाणु और उनके शुक्राणु अस्पताल ने लिए और 14 मई 2025 को भ्रूण (Embryo) पत्नी के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किए गए. इसके बाद 5 जनवरी 2026 को मीनू राठौर ने दो बच्चियों को जन्म दिया. परिवार को विश्वास था कि दोनों बच्चियां उन्हीं की जैविक संतान हैं. लेकिन बच्चियों को देखकर कुछ शक हुआ जिसके बाद उन्होंने डीएनए जांच करने का फैसला किया. कपल ने दावा किया कि जब डीएनए जांच कराई गई तो रिपोर्ट ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया.

‘क्या भ्रूण या बच्चे की अदला-बदली की गई?’

कपल का कहना है कि ये उनके जैविक बच्चे नहीं हैं. शिकायतकर्ता का आरोप है कि इससे यह संकेत मिलता है कि उनके भ्रूण या बच्चे की अदला-बदली की गई और उनका जैविक बच्चा किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया गया है. पीड़ित दम्पति का आरोप है कि शुरुआती महीनों में उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा. अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया.

राहुल और उनकी पत्नी का ये भी दावा है कि उन्होंने इस संबंध में कई संस्थाओं और अधिकारियों को शिकायत की. लेकिन पांच महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें न तो अपने बच्चों का पता चल पाया है और न ही मामले में कोई ठोस प्रगति हुई है. यही वजह है कि पूरा परिवार परेशान है. उनका कहना है कि घटना के बाद से पिता बोल नहीं पा रहें हैं और पत्नी की स्थिति कई बार बिगड़ चुकी है.

हम बस अपना असली बच्चा चाहते हैं : मीनू

मीनू ने कहा कि हम किसी का नुकसान नहीं चाहते हैं, हम बस अपना असली बच्चा चाहते हैं. “जैसे मैं अपने बच्चे के लिए भटक रही हूं वैसे वो मां भी अपने बच्चे के लिए तरस रही होगी, जिसका बच्चा मेरे पास है.” मीनू के अनुसार, घटना का असर बच्चों की परवरिश पर पड़ है और यही वजह है कि वो आज तक उन्हें अपना दूध भी नहीं पीला पाई हैं. दम्पति ने कहा, ” भले ही ये बच्चियां हमारी नहीं है लेकिन इनको तकलीफ ना हो, उसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है. यही वजह है कि हम उन्हें बाहर का दूध पीला रहें हैं.

दंपति का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं पता कि कथित गड़बड़ी डिलीवरी के दौरान हुई है या पहले. लेकिन जब भी हुआ है उसने उनके विश्वास को कमजोर कर दिया. हालांकि, इन आरोपों को लेकर जब एससीआई आईवीएफ हॉस्पिटल से प्रतिक्रिया लेनी चाहिए तो उन्होंने जवाब नहीं दिया और कहा कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

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