Skanda Shasti 2026: आज यानी 19 जून 2026 को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है, जिसे सनातन धर्म में श्रद्धा और भक्ति के साथ स्कंद षष्ठी के रूप में मनाया जाता है. यह पावन दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र तथा देवताओं के सेनापति भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को समर्पित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त इस दिन भगवान कार्तिकेय की आराधना करते हैं और व्रत रखते हैं, उनके जीवन के सभी संकट दूर होते हैं तथा उन्हें विजय और सफलता की प्राप्ति होती है.

भगवान कार्तिकेय के मंत्र और स्तुति

स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय को प्रसन्न करने के लिए उनके विशेष मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है. यदि आप भी आज पूजा कर रहे हैं, तो इन मंत्रों का जाप अवश्य करें

मुरुगन स्तुति

आरुमुखा ॐ मुरुगा.
वेल वेल मुरुगा मुरुगा.
वा वा मुरुगा मुरुगा.
वडिवेल अळगा मुरुगा.
अडियार एल्लैय्या मुरुगा.
अळगा मुरुगा वरुवाय.
वडिवेलुडने वरुवाय॥

मूल मंत्र

ॐ शरवण भवाय नमः.

सफलता और शक्ति के लिए

ॐ स्कन्दाय नमः.

गायत्री मंत्र

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे.
महासेनाय धीमहि.
तन्नः स्कन्दः प्रचोदयात्॥

दक्षिण भारत में भगवान कार्तिकेय को ‘मुरुगन’ या ‘सुब्रह्मण्यम’ के नाम से पूजा जाता है. मान्यता है कि स्कंद षष्ठी के दिन ‘स्कंद षष्ठी कवचम्’ का पाठ करने से बड़े से बड़े शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है.

स्कंद षष्ठी की पूजा विधि

आज के दिन घर की उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. चूंकि कार्तिकेय जी के साथ माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा का भी विधान है, इसलिए पूरे शिव परिवार का ध्यान करें. भगवान कार्तिकेय का जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करें. उन्हें पीले वस्त्र, पीले फूल, हल्दी, चंदन और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद फलों और मिठाइयों का भोग लगाएं. फिर धूप, दीप और अगरबत्ती जलाएं. भगवान कार्तिकेय के मंत्रों का जाप करें तथा व्रत कथा का पाठ करें. अंत में घी का दीपक जलाकर भगवान कार्तिकेय की आरती करें और अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें.

स्कंद षष्ठी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय ने इसी तिथि को महाबली असुर तारकासुर और सूरपद्मन का वध कर देवताओं को उनके कष्टों से मुक्ति दिलाई थी. इसलिए उन्हें ‘युद्ध का देवता’ भी कहा जाता है. यह व्रत न केवल जीवन के संकटों और बाधाओं को दूर करता है, बल्कि कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति को भी मजबूत बनाने वाला माना जाता है. जो लोग इस दिन पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा के साथ व्रत रखते हैं, उनके बच्चों के जीवन में उन्नति के मार्ग खुलते हैं तथा परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली का वास होता है।

अस्वीकरण- यहाँ दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओ पर आधारित है किसी भी उपाय को करने से पूर्व संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य ले।

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