अयोध्या: सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य, धार्मिक अनुष्ठान या पूजा की शुरुआत सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा और वंदना से की जाती है. मान्यता है कि भगवान गणेश विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता हैं. उनकी पूजा करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और शुभ कार्य सफलतापूर्वक पूरा होता है. इसी वजह से भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता का दर्जा प्राप्त है. तो चलिए इस रिपोर्ट में विस्तार से जानते हैं आखिर क्या कथा है.

शुभ कार्य से पहले क्यों होती है भगवान गणेश की पूजा?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश का संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से जुड़ा है. एक कथा के मुताबिक माता पार्वती ने गणेश जी को अपने द्वार की रक्षा के लिए नियुक्त किया था. जब भगवान शिव वहां पहुंचे तो गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया. इसके बाद भगवान शिव और गणेश जी के बीच युद्ध हुआ और गणेश जी का सिर कट गया. बाद में माता पार्वती के आग्रह पर भगवान शिव ने गणेश जी को हाथी का सिर प्रदान कर उन्हें पुनर्जीवित किया.

अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम बताते हैं कि भगवान गणेश को प्रथम पूज्य बनाए जाने के पीछे एक महत्वपूर्ण कथा और भी है. उनके अनुसार एक बार भगवान गणेश और उनके भाई कार्तिकेय के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया. दोनों ने स्वयं को श्रेष्ठ बताया. तब भगवान शिव ने कहा कि जो सबसे पहले पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करके वापस आएगा, उसे श्रेष्ठ माना जाएगा.

कार्तिकेय ब्रह्मांड की परिक्रमा करने निकले, गणेश जी ने अपनाई बुद्धि की राह

कार्तिकेय जी अपने वाहन मयूर पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा करने निकल गए. वहीं भगवान गणेश का वाहन मूषक था. गणेश जी ने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया और भगवान शिव तथा माता पार्वती की सात परिक्रमा कर उनके सामने खड़े हो गए. उन्होंने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही संपूर्ण संसार का वास है.

भगवान शिव और माता पार्वती ने गणेश जी को क्यों माना श्रेष्ठ?

भगवान शिव और माता पार्वती गणेश जी की बुद्धि और भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें श्रेष्ठता का सम्मान दिया. पंडित कल्कि राम के मुताबिक इसी प्रसंग से भगवान गणेश के प्रथम पूज्य होने की मान्यता को जोड़ा जाता है.

विघ्नहर्ता के आह्वान से निर्विघ्न पूरा होता है धार्मिक अनुष्ठान

पंडित कल्कि राम कहते हैं कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा और स्तवन के बिना धार्मिक अनुष्ठान को पूर्ण नहीं माना जाता. मान्यता है कि गणेश जी का आह्वान करने से अन्य देवी-देवताओं की उपासना भी निर्विघ्न संपन्न होती है. इसी कारण आज भी किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत ‘श्री गणेशाय नमः’ से करने की परंपरा चली आ रही है.

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